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अमेरिका में राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी, मिडटर्म चुनाव में क्यों बदला भारतीय-अमेरिकियों का प्लान?

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:56 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों से प्रेरित होकर भारतीय-अमेरिकी समुदाय मध्यावधि चुनावों में अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की रणनीति बदल ...और पढ़ें

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की बदली रणनीति (फाइल फोटो)

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की बदली रणनीति (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की भारत और प्रवासी भारतीयों के खिलाफ नीतियों ने राजनीतिक दमखम रखने वाले भारतीय प्रवासियों को नए सिरे से अमेरिकी सत्ता में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के पुरजोर प्रयासों के लिए प्रेरित किया है।

इसलिए अब भारतीय-अमेरिकी केवल सांसद बनकर अमेरिकी सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में अपने मुद्दों के प्रति सहानुभूति रखने वाले अन्य उम्मीदवारों का भी समर्थन कर रहे हैं।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेताओं ने कहा कि कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में मजबूत मौजूदगी के बावजूद समुदाय के भीतर की प्रतिस्पर्धा के कारण निर्वाचित पदों पर भारतीय प्रवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व कम रहा है। प्रवासी समुदाय के एक नेता ने कहा,'ऐसे मौके आए हैं जब कई भारतीय-अमेरिकी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े हैं। इससे समुदाय के उम्मीदवारों की कम संख्या में जीत हुई।'

उन्होंने राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एकजुटता पर जोर दिया। कार्यकाल पूरा कर रही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के छह सदस्य हैं, लेकिन यह संख्या घटकर चार रह सकती है। इलिनोइस से राजा कृष्णमूर्ति और मिशिगन से श्री थानेदार प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके।

भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना (कैलिफोर्निया-17), प्रमिला जयपाल (वाशिंगटन-7), एमी बेरा (कैलिफोर्निया-3) और सुहास सुब्रमण्यम (वर्जीनिया-10) फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद के चुनाव में मैदान में हैं।

कांग्रेस पर किस दल का नियंत्रण तय करेगा ये चुनाव

अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होने वाले मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्यों और ऊपरी सदन सीनेट के 100 सदस्यों में से करीब एक-तिहाई का चुनाव होता है। इन चुनावों में कई राज्यों के गवर्नर व विधानसभाओं के साथ कुछ शहरों के मेयर और अन्य स्थानीय अधिकारियों के चुनाव भी शामिल होते हैं।

नतीजे तय करते हैं कि कांग्रेस पर किस दल का नियंत्रण होगा और राष्ट्रपति की विधेयक पारित कराने की क्षमता पर भी उनका असर पड़ सकता है।

हिंदुओं के प्रति सहानुभूति रखने वालों का भी समर्थन

कैलिफोर्निया में हृदय रोग विशेषज्ञ और अमेरिकन्स4हिंदूज पालिटिकल एक्शन कमेटी (पीएसी) के संस्थापक रोमेश जापरा ने कहा,'चुनाव में भारतीय-अमेरिकियों का समर्थन करना ही काफी नहीं। हमें भारतीय प्रवासियों और हिंदुओं के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोगों का भी समर्थन करना होगा।'

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय-अमेरिकी, अनुकूल उम्मीदवारों का भी समर्थन अमेरिका में हिंदू समुदाय की खासी मौजूदगी है। हमें फैसले लेने वाली मेज पर जगह बनानी होगी, वरना हम खुद मेन्यू में शामिल हो जाएंगे।

प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों से आगे देखें

व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार अजय जैन भूटोरिया ने कहा,'मेरी भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों को सलाह है कि वे प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों से आगे देखें और जिन कांग्रेसनल जिलों का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं, वहां के लोगों की आकांक्षाओं पर ध्यान दें।'

कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यूजर्सी, न्यूयार्क, वाशिंगटन, इलिनोइस, पेनसिल्वेनिया व जार्जिया में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की मजबूत मौजूदगी है। जार्जिया, मिशिगन व नार्थ कैरोलाइना जैसे राज्यों में एक या दो प्रतिशत वोट भी चुनाव का रुख मोड़ सकते हैं।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)