नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। साल 2010 से 2017 के सात वर्षों के दरम्यान भारतीय मूल के लोगों की संख्या अमेरिका में तेजी से बढ़ी है। वृद्धि के लिहाज से एशियाई देशों में यह दूसरे स्थान पर है। 206.6 फीसद के साथ नेपाल पहले तो 38.3 फीसद के साथ भारत दूसरे पायदान पर है। साउथ एशियन एडवोकेसी ग्रुप साउथ एशियन अमेरिकंस लीडिंग टूगेदर (साल्ट) की ताजा जनसांख्यिकीय रिपोर्ट में ये बातें सामने आई है।

बिना वैध दस्तावेज के
रिपोर्ट बताती है कि 6.3 लाख भारतीय अमेरिका में ऐसे हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं है। 2010 की इनकी संख्या में 72 फीसद इजाफा दिखा है। इनमें ज्यादातर ऐसे अप्रवासियों की संख्या है जिनकी वीजा अवधि समाप्त हो चुकी है फिर भी वे अमेरिका में रहे हैं। 2016 में ऐसे लोगों की संख्या 2.5 लाख थी।

अमेरिका में दक्षिण एशियाई लोग
सभी दक्षिण एशियाई देशों से अमेरिका बसने वाले लोगों की संख्या 2010 में 35 लाख थी। 2017 में यह बढ़कर 54 लाख हो गई। 44 लाख के साथ भारत की इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी है।

आश्रय मांगने वालों की संख्या
पिछले दस साल में अमेरिका की चमक-दमक देखते हुए वहां शरण लेने वालों की संख्या में तेज इजाफा हुआ है। अमेरिकी इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने 2017 से अब तक दक्षिण एशियाई मूल के 3013 लोगों को पकड़ा है। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर पैट्रोल ने अक्टूबर 2014 से अप्रैल 2018 के बीच 17119 दक्षिण एशियाई लोगों को गिरफ्तार किया है।

एच-4 वीजा धारक
रिपोर्ट के अनुसार 1997 से 17 लाख एच-1बी वीजा धारकों के आश्रितों (पत्नियों) को एच-4 वीजा दिया जा चुका है।

घरेलू आय
बांग्लादेशी और नेपाली समुदायों की घरेलू आय सभी एशियाई अमेरिकी समूहों में सबसे कम है। बांग्लादेशियों की औसत आय 49,800 डॉलर है तो नेपालियों के लिए यह आंकड़ा 43,500 डॉलर का है।

आय की असमानता
रिपोर्ट के अनुसार 54 लाख कुल दक्षिण एशियाई लोगों में से करीब दस फीसद लोग गरीबी से ग्रस्त हैं। इनकी संख्या करीब 4.72 लाख है।

बड़ा वोट बैंक
रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को 2020 के चुनाव के लिए एक बड़े वोट बैंक के रूप में दिखाया गया है। इनकी कुल आबादी में से करीब आधे लोग (49.9 फीसद) वोट देने की उम्र में हैं। 2016 में इन लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था। एशियाई अमेरिकी मतदाताओं की संख्या पिछले एक दशक में दोगुना हो चुकी है। 2001 में इनकी संख्या 20 लाख से बढ़कर 2016 में 50 लाख हो चुकी है। इनमें भारतीयों की हिस्सेदारी 15 लाख से अधिक है। पाकिस्तानियों की संख्या 2.22 लाख और बांग्लादेशियों की संख्या 69,825 है।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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