वीटो के बिना UNSC के नए स्थायी सदस्य दूसरे दर्जे के बन जाएंगे, भारत की दो टूक
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वीटो अधिकार के बिना नए स्थायी सदस्य 'दूसरे दर्जे' के सदस्य बन जाएंगे।

वीटो के बिना यूएनएससी के नए स्थायी सदस्य दूसरे दर्जे के बन जाएंगे। (एएनआई)
HighLights
भारत ने वीटो रहित स्थायी सदस्यों को 'दूसरे दर्जे' का बताया।
सभी स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार मिलना चाहिए: भारत।
भारत यूएनएससी सुधारों का लंबे समय से समर्थक है।
डिजिटल डेस्क, संयुक्त राष्ट्र। भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अगर कोई सुधार होता है, जिसके तहत वीटो के अधिकार के बिना नए स्थायी सदस्यों की एक अलग श्रेणी बनाई जाती है तो नए सदस्य दूसरे दर्जे के सदस्य बन जाएंगे।
सुरक्षा परिषद में फैसला लेने का अधिकार मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के पास ही बना रहेगा। बता दें कि चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य हैं और इनके पास वीटो का अधिकार है। जबकि सुरक्षा परिषद में दस अस्थायी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को कहा कि जब तक वीटो का प्रविधान है, तब तक सुधार के बाद भी परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए। निष्पक्षता और न्याय के लिए जरूरी है कि सभी स्थायी सदस्यों के अधिकार और जिम्मेदारियां समान हों।
उन्होंने कहा, 'वीटो पर भारत का रुख सैद्धांतिक और जगजाहिर है। हम एक बार फिर दोहराते हैं कि जब तक वीटो का प्रविधान मौजूद है, तब तक सुधार के बाद गठित परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास यह अधिकार होना चाहिए।'
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'वीटो के सवाल पर विषयवार चर्चा' के मुद्दे पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पर्वतनेनी ने कहा, 'सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत वीटो के अधिकार के बिना स्थायी सदस्यों की एक नई श्रेणी बनाने से इस श्रेणी में शामिल देश वास्तव में दूसरे दर्जे के सदस्य बन जाएंगे।
इससे पांच स्थायी सदस्यों के फैसले लेने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आएगा।' भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट पाने की कोशिश भी कर रहा है।
भारत लगातार कर रहा सुधार की वकालत
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर कई सालों से लगातार प्रयास कर रहा है। भारत का कहना है कि 1945 में बनी यह संस्था 21वीं सदी के हिसाब से उपयुक्त नहीं है और यह मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती है।
पर्वतनेनी ने याद दिलाया कि 1965 में सुरक्षा परिषद में एकमात्र विस्तार हुआ था, जिसमें स्थायी सदस्यों की संख्या पांच बरकरार रखते हुए अस्थायी सदस्यों की संख्या छह से बढ़ाकर दस की गई थी।
(समाचार एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ)
