यूनाइटेड नेशन, पीटीआइ। भारत ने जम्मू-कश्मीर में रहने वाले बच्चों को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान को फटकार लगाई है। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान में छोटे बच्चों को चरमपंथी विचारधाराओं वाले स्कूल में भेजा जाता है और उन्हें आतंकवादी समूहों में भर्ती कर उनके भविष्य को बर्बाद किया जा रहा  है। 

गुरुवार को 'बच्चों के अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण' पर महासभा की तीसरी समिति के सत्र को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव पॉलौमी त्रिपाठी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल ने फिर झूठे राजनीतिक प्रचार से समिति की ध्यान भटकाने की कोशिश की  है। 

मलीहा लोधी को दिया जवाब

त्रिपाठी, बुधवार को पाकिस्तान के निवर्तमान संयुक्त राष्ट्र की राजदूत मलीहा लोधी द्वारा समिति में की गई टिप्पणी का जवाब दे रही थीं, जिसमें मलीहा ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया था और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कश्मीर में बच्चों की स्थिति का उल्लेख किया था। 

खतरे में बच्चों का भविष्य

पाकिस्तान पर हमला करते हुए, त्रिपाठी ने कहा, 'यह एक ऐसा देश है, जहां छोटे बच्चों को हिंसक चरमपंथी विचारधाराओं वाले स्कूलों में शिक्षा मिलती है और उन्हें आतंकवादी समूहों में भर्ती कराई जाती है, जिससे न केवल उनके बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है, बल्कि इससे सीमा के आस-पास के बच्चों का भविष्य भी खतरे में है। अगर यह मासूम बच्चों के अधिकारों और स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं है, तो क्या है? उन्होंने यह बात 2018 में  स्वतंत्रता से वंचित बच्चों पर आधारित वैश्विक अध्ययन को लेकर लोधी द्वारा दिए गए संदर्भ के जवाब में कही। 

हताशा में अप्रसंगिक संदर्भ दिया

त्रिपाठी ने कहा कि पाकिस्तान ने समर्थन प्राप्त करने की हताशा में संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ को अप्रसंगिक संदर्भ में हवाला दिया। इस प्रतिनिधिमंडल के अतीत में निराधार आरोपों से अंतररार्ष्ट्रीय समुदाय गुमराह नहीं हुआ है और हमें विश्वास है कि आगे भी नहीं होगा। हम इस मुद्दे पर और उलझने की इच्छा नहीं रखते हैं।

बच्चों के अधिकारों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव

त्रिपाठी ने कहा कि जहां बच्चों के अधिकारों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है, वहीं वे गरीबी, अवसर की असमानता, सशस्त्र संघर्ष, आतंकवाद और मानवतावादी संकटों से ग्रस्त दुनिया में सबसे कमजोर बने हुए हैं। उन्होंने डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने, डिजिटल वातावरण के बच्चों द्वारा समझ बढ़ाने और मजबूत ढांचा बनाने सहित उपायों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे अपनी भलाई से समझौता किए बिना डिजिटल तकनीकों का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक और चुनौती है जिसपर जल्द कदम उठाना चाहिए ताकि इससे  उनपर असर न पड़े।  

बच्चों के अधिकारों को लेकर भारत का कदम

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए भारत द्वारा उठाए गए उपायों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में 'स्वच्छ भारत मिशन' के साथ-साथ मिड-डे मील योजना का उद्देश्य स्कूल में बच्चों की उपस्थिति को बेहतर बनाना है। सेव द गर्ल चाइल्ड, एजुकेट द गर्ल चाइल्ड ' कार्यक्रम के माध्यम से बाल लिंग अनुपात में व्यापक रूप से असंतुलन को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

Posted By: Tanisk

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