'खत्म हो गई संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता', विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भारत ने UN के दावों की उड़ाईं धज्जियां
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जीना रोमेरो के उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था ...और पढ़ें

भारत ने यूएन की दूत के दावों को किया सिरे से खारिज। (फाइल फोटो।)
HighLights
भारत ने UN की युवा अधिकारों संबंधी रिपोर्ट खारिज की।
गुमनाम दावों पर आधारित रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल।
भारतीय संविधान युवाओं को स्वतंत्रता और अधिकार देता है।
डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जीना रोमेरो के उन दावों को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि देश में युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय पर बात करने के कारण बदले की कार्रवाई या कलंक का सामना करना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि ये आरोप गुमनाम और बिना पुष्टि किए गए बयानों पर आधारित हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति के 81वें सत्र में शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता के अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) के साथ हुई एक बातचीत के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को ये स्वतंत्रताएं प्रदान करता है।
अनुज स्वरूप ने क्या कहा?
स्वरूप ने कहा, "भारत ने शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) की रिपोर्ट पर ध्यान दिया है। भारत में हमारे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत हर नागरिक को ये स्वतंत्रताएं, साथ ही बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई हैं। इनकी सुरक्षा एक स्वतंत्र न्यायपालिका, एक स्वतंत्र प्रेस और एक सशक्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा की जाती है।"
रोमेरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने भारत के युवाओं से जुड़े इसके दावों के आधार पर सवाल उठाए। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सौंपी गई है जब भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ युवाओं का बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन चल रहा है।
'खत्म हो गई संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता'
उन्होंने कहा, "फिर भी विशेष प्रतिवेदक सुश्री जीना रोमेरो का दावा है कि भारत में युवा अगर मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय पर बात करते हैं तो उन्हें बदले की कार्रवाई या सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उन्होंने इसके समर्थन में केवल फुटनोट में कुछ अज्ञात लोगों की बातों का हवाला दिया है। रिपोर्ट लिखने का यह मनमाना तरीका ही वह मुख्य कारण है, जिसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र और उसके संस्थानों की विश्वसनीयता खत्म हो गई है।"
उन्होंने रोमेरो की रिपोर्ट को बिना किसी आधार के, सुनी-सुनाई बात करार दिया। उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के खिलाफ, गुमनाम और बिना पुष्टि किए गए दावों के आधार पर लगाया गया यह व्यापक आरोप कोई सबूत नहीं है। यह महज सुनी-सुनाई बातें हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का रूप दे दिया गया है और मेरा प्रतिनिधिमंडल इसे पूरी तरह से खारिज करता है।"
स्वरूप ने भारत में युवाओं के लिए नागरिक स्थान (सिविक स्पेस) के बारे में रिपोर्ट के आकलन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसके समर्थन में राजनीतिक आंदोलनों में युवाओं की भागीदारी और वरिष्ठ सरकारी नेताओं के साथ उनके जुड़ाव का हवाला दिया।
जुलाई के विरोध-प्रदर्शनों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय मंत्रियों की बातचीत का जिक्र करते हुए स्वरूप ने कहा, "दिलचस्प बात यह है कि उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा भारतीयों ने एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन खड़ा किया। किस दमनकारी देश में युवाओं की एक ऐसी व्यंग्यात्मक पार्टी सरकार से सवाल पूछ सकती है, राजधानी की ओर मार्च कर सकती है और फिर देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर बातचीत कर सकती है?"
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के पिछले महीने दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए कहा, "मानवाधिकार उच्चायुक्त ने पिछले महीने मानवाधिकार परिषद में कहा था कि भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों के संदर्भ में युवा नेताओं के साथ बातचीत करना कहीं अधिक प्रभावी है। शायद विशेष प्रतिवेदक का ध्यान इस बात पर नहीं गया।"
सरकार की प्रतिक्रिया का किया जिक्र
सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए स्वरूप ने कहा कि सरकार ने युवाओं के साथ सकारात्मक बातचीत की है और परीक्षा में होने वाली धांधली को रोकने के लिए कदम उठाए हैं।
भारत के विकास में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए स्वरूप ने विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद का जिक्र किया, जिसमें राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देने के लिए 50 लाख से अधिक युवा एक साथ आए। स्वरूप ने विशेष प्रतिवेदक से आग्रह किया कि वे अपनी रिपोर्टिंग में अधिक गहन जांच और निष्पक्षता सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा, "एक ऐसी पदाधिकारी, जो 1.4 अरब लोगों के बारे में आम राय बनाने के लिए गुमनाम जानकारियों पर निर्भर रहती है, वह अपने ही पद की जिम्मेदारियों के साथ अन्याय कर रही है। हम इस विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) से आग्रह करते हैं कि किसी को बदनाम करने से पहले वह तथ्यों की जांच कर लें और अपनी रिपोर्ट में जरूरी गंभीरता तथा निष्पक्षता लाएं।"
रोमेरो कोलंबिया के मानवाधिकार समर्थक हैं और शांतिपूर्ण सभा करने तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक हैं।
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