वाशिंगटन, प्रेट्र। India-China Tension, भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) पर गतिरोध जारी है।12 अक्टूबर को भारत और चीन के कोर कमांडरों की बैठक होने वाली है, जिसमें पूर्वी लद्दाख के सभी टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों को हटाने की रुपरेखा तय करने के एजेंडे पर बातचीत होनी है। यह भारत और चीन के बीच सातवें दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत होगी। चीन के अड़ियल रुख की वजह से सीमा पर अब तक गतिरोध जारी है, भारत इस तनाव को कम करने की पूरी कोशिश कर रहा है। 

इस बीच, अमेरिका ने चीन को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उसने चीन पर एक बार फिर करारा हमला बोला है। अमेरिका ने कहा है कि भारत-चीन सीमा पर गतिरोध के बीच चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 60,000 से ज्यादा सैनिकों को जमा कर रखा है। उन्होंने चीन के इस बुरे रवैये और क्वाड देशों के लिए चेतावनी खड़ी करने को लेकर उस पर निशाना साधा है।

पोंपियो ने सीमा पर तनाव को लेकर चीन के व्यवहार पर ना केवल उसे फटकार लगाई बल्कि यह भी कहा कि बीजिंग क्वाड देशों के लिए खतरा बन गया है। बता दें हिंद-प्रशांत देशों के विदेश मंत्रियों के समूह को क्वाड के तौर पर जाना जाता है। इस समूह में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इन देशों के विदेश मंत्री मंगलवार को जापान की राजधानी टोक्यो में मिले थे। कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद यह विदेश मंत्रियों की पहली मुलाकात थी। विदेश मंत्रियों की यह बैठक हिंद-प्रशांत, दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक सैन्य रवैये और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत के साथ तनाव के बीच हुई।

टोक्यो में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अपने समकक्षों के साथ दूसरी क्वाड बैठक में भाग लेने के बाद अमेरिका लौटे पोंपियो ने शुक्रवार को 'द गाइ बेंसन' शो में कहा कि भारतीय सेना उत्तरी सीमा पर 60 हजार चीनी जवानों की तैनाती को देख रही है। उन्होंने कहा, 'पिछले सप्ताह मैं भारत, ऑस्ट्रेलिया, और जापान के अपने समकक्षों के साथ था। मैं क्वाड की बैठक में भाग लेने गया था। यह एक ऐसा प्रारूप है, जिसमें बड़े लोकतंत्र और शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं वाले चार देश शामिल हैं। इनमें से हर एक देश को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा खतरे का अंदेशा है।' पोंपियो ने मंगलवार को टोक्यो में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात को फलदायी बताया। एक अन्य साक्षात्कार में पोंपियो ने कहा कि चीन के साथ इस लड़ाई में क्वाड देशों को अमेरिका को सहयोगी बनाने की आवश्यकता है।

भारत-चीन की सेनाएं बॉर्डर पर तैनात

पूर्वी लद्दाख में चीन के अड़ियल रवैये के चलते गतिरोध अब तक बरकरार है। दोनों देशों के सैनिक सीमा पर डटे हुए हैं। इस बीच, भारत और चीन के बीच सोमवार को होने वाली कोर कमांडर की बैठक से पहले चाइना स्टडी ग्रुप (सीएसजी) की बैठक हुई। इसमें पूर्वी लद्दाख के मौजूदा हालात की समीक्षा करने के साथ ही कोर कमांडरों की बैठक में भारत की तरफ से उठाए जाने वाले मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई। सीएसजी में विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और सेना के तीनों अंगों के प्रमुख शामिल हैं। सोमवार को होने वाली कोर कमांडर की बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे। 

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