न्‍यूयॉर्क, एजेंसी। पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के टकराव के बीच अमेरिका में भारतीय विदेश सचिव की अमेरिकी समकक्ष से साथ मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। इस मुलाकात पर चीन की पैनी नजर है। इस मुलाकात में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की हिंसात्‍मक रवैया, दक्षिण चीन सागर में चीनी आक्रामकता, दक्षिण एशियाई क्षेत्र में क्षेत्रीय अस्थिरता, संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत की स्‍थाई सदस्‍यता, कोरोना महामारी से उपजे संकट के साथ H1-B बीजा पर भी चर्चा हुई। H1-B पर भारतीय विदेश मंत्रालय की चुप्‍पी पर यह वार्ता सुर्खियों में है।

दोनों देशों के बीच सचिव स्‍तर की वार्ता 

भारत-चीन के मध्‍य जबरदस्‍त तनाव के बीच भारतीय विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला और विदेश मामलों के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी डेविड हेल के बीच तमाम ज्‍वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। कोरोना महामारी के कारण दोनों देशों के बीच हुई विदेश सचिव की वार्ता वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हुई। भारतीय विदेश विभाग ने कहा कि दोनों देशों ने समान उद्देश्‍यों पर एक साथ काम करने पर अपनी सहमति जताई। भारत के समक्ष उपजी सामरिक चुनौतियों को लेकर व्‍यापक चर्चा हुई। 

रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर सहमति 

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि श्रृंगला और हेल ने अंतरराष्‍ट्रीय मुद्दों की पूरी एक पूरी श्रृंखला पर भारत-अमेरिकी सहयोग पर चर्चा की। इस मौके पर भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई। बता दें कि यह साझेदारी फरवरी में एक संयुक्त बयान में जारी की गई थी, जब ट्रंप ने भारत का दौरा किया और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रशांत क्षेत्र, दक्षिण चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में चीन की आक्रमकता को देखते हुए यह साझेदारी काफी अहम हो जाती है। 

भारत-प्रशांत क्षेत्र को मुक्‍त करने का संकल्‍प 

दोनों देशों के बीच सचिव स्‍तर की वार्ता में भारत-प्रशांत क्षेत्र पर बृहद चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि दोनों मुल्‍क एक भारत-प्रशांत क्षेत्र को एक मुक्‍त क्षेत्र बनाने पर एक मत थे। भारतीय विदेश सचिव श्रृंगला और उनके अमेरिकी समकक्ष हेल इस क्षेत्र को मुक्‍त बनाने के लिए एक साथ काम करने पर राजी हुए। भारतीय विदेश विभाग अपने साझेदार का नाम लिए बगैर भारत-प्रशांत क्षेत्र को मुक्‍त, समावेशी और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फ‍िर से पुष्टि की। बता दें कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में जापान और ऑस्‍ट्रेलिया इसके मुख्‍य साझेदार है। गौरतलब है कि चीन की आक्रामकता के कारण भारत-प्रशांत क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो गई है।   

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