वाशिंगटन, पीटीआइ। अमेरिका भारत के साथ हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में बड़ी नौसैनिक साझेदारी की संभावना पर कार्य कर रहा है। अमेरिका के नौसेना प्रमुख एडमिरल जॉन रिचर्डसन का हाल का भारत दौरा दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करने का अहम मौका था। इस दौरान शीर्ष स्तर पर दोनों देशों की नौसेनाओं ने अपने विचार और उद्देश्य साझा किए और बहुमुखी तालमेल बढ़ाने का फैसला किया।

तीन दिन के दौरे में रिचर्डसन ने अपने भारतीय समकक्ष एडमिरल सुनील लांबा के साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और भविष्य में होने वाले संयुक्त अभ्यासों पर चर्चा की। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत के मद्देनजर दोनों देशों के तालमेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिकी नौसेना ने बयान जारी कर एडमिरल रिचर्डसन के दौरे को दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण मौका करार दिया है। बयान में कहा गया है कि दोनों नौसेना प्रमुखों ने बातचीत में साझेदारी बढ़ाने को रणनीतिक रूप से जरूरी माना है।

दोनों ने समुद्री सुरक्षा के लिहाज से सूचनाओं के आदान-प्रदान, तालमेल बढ़ाने, संयुक्त अभ्यास करने और अन्य साझेदारियों का फैसला किया है। दोनों देशों का उद्देश्य हिंद और प्रशांत महासागर को आवागमन के लिए सुरक्षित और सुगम बनाए रखना है। एडमिरल रिचर्डसन ने तालमेल बढ़ाने की एडमिरल लांबा की सोच की प्रशंसा की है।

गौरतलब है कि चीन हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में तेजी से अपना नौसैनिक दखल बढ़ा रहा है। वह दोनों ही महासागरों में सिर्फ अपने जहाजों के आवागमन के लिए लेन बनाने की नीति पर भी कार्य कर रहा है। छोटे पड़ोसी देशों के दावे को खारिज करते हुए चीन ने दक्षिण चीन सागर पर कब्जा कर लिया है। वहां पर किसी अन्य देश का जहाज जाने पर चीन रुकावट पैदा करता है और आपत्ति जताता है। अमेरिका के गश्ती पोतों को भी उसने कई बार रोका है।

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