इस्लामाबाद, प्रेट्र । नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को 15 जनवरी तक आठ अरब डॉलर की सहायता देने के मामले में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने कड़ी शर्ते रख दी हैं। आइएमएफ चाहता है कि पाकिस्तान सरकार आर्थिक असंतुलन दूर करने का ठोस आश्वासन दे, इसके बाद वह उसे सहायता देने का प्रस्ताव अपनी कार्यकारी परिषद के पास भेजे।

नकदी संकट के चलते भुगतान की समस्या से जूझ रहा पाकिस्तान आइएमएफ से आठ अरब डॉलर की आर्थिक सहायता चाहता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को मामले में पहले चरण की वार्ता को पूरा किया। इस सिलसिले में वित्त मंत्री असद उमर की वाशिंगटन स्थित आइएमएफ मुख्यालय में बैठे संस्था के प्रमुख हेराल्ड फिंगर से वीडियो लिंक से वार्ता हुई। दोनों के बीच बातचीत में बिजली की कीमत बढ़ाने, ब्याज दर बढ़ाने, रुपये की कीमत कम करने और कर संग्रह का लक्ष्य बढ़ाने पर वार्ता हुई।

पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि आइएमएफ के साथ समझौते का मसौदा क्रिसमस अवकाश से पहले तैयार हो जाएगा। इसके बाद 15 जनवरी को आइएमएफ की कार्यकारी परिषद की बैठक में उसे आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार गुरुवार को हुई बातचीत फलदायी और सहयोगात्मक रही। इस दौरान आइएमएफ की अपेक्षा पाकिस्तान को मिले कर्ज के असंतुलन को दूर करने की रही। आइएमएफ चाह रहा है कि पाकिस्तान 22 प्रतिशत तक बिजली मूल्य बढ़ाए जिससे उसकी बिजली परियोजनाओं पर हुआ व्यय निकल सके। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2018 तक पाकिस्तान पर 31 लाख करोड़ रुपये का कर्ज और देनदारी हो चुकी थी, जो लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते अगर आर्थिक सहायता में विलंब हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है।

Posted By: Tanisk