होर्मुज पर नाकेबंदी से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं ट्रंप, क्या होगा मोजताबा का अगला कदम?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी लागू कर दी है, जिससे ईरान के तेल निर्यात पर गंभीर असर ...और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 7.30 बजे) से लागू हो गई। अमेरिकी नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल निर्यात पर पड़ सकता है।
अगर ईरान अपने तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नहीं बेच पाएगा, तो उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर होगी और लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है, इसलिए यह कदम उसकी आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार होगा। हालांकि ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया है कि इससे वैश्विक तेल कीमतें और बढ़ सकती हैं।
अमेरिका की रणनीति
अब तक अमेरिका ने संतुलित रणनीति अपनाई थी। उसने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए ईरानी तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी और कुछ समय के लिए ईरान को तेल बेचने से जुड़े प्रतिबंधों में ढील भी दी थी। नई नाकेबंदी इस नीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
होर्मुज से सामान्य दिनों में करीब 150 जहाज रोज गुजरते हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं। नाकेबंदी और जहाजों की आवाजाही में कमी के कारण पहले ही तेल कीमतों में उछाल देखा गया है।
हालांकि यदि अमेरिकी कार्रवाई से अन्य खाड़ी देशों के तेल जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिलता है, तो भविष्य में कीमतें स्थिर या कम भी हो सकती हैं- लेकिन यह कितनी जल्दी होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है और ईरान के पास मिसाइल व ड्रोन हमले की क्षमता भी है। ऐसे में यह नाकेबंदी सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य तनाव को भी बढ़ा सकती है।
