H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड पर गहराया संकट, अमेरिका में नए बिल से भारतीय IT पेशेवरों पर संकट
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक नए विधेयक से एच-1बी वीजा धारकों का न्यूनतम वेतन $60,000 से $1.40 लाख करने का ...और पढ़ें
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अमेरिकी श्रम विभाग ने ग्रीन कार्ड आवेदनों पर लगाई रोक। (फाइल फोटो)
HighLights
एच-1बी न्यूनतम वेतन $60,000 से $1.40 लाख करने का प्रस्ताव।
अमेरिकी श्रम विभाग ने ग्रीन कार्ड आवेदनों पर लगाई रोक।
GOPIO ने ट्रंप से निष्पक्ष नियम अपनाने की अपील की।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। हजारों मील दूर अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले भारतीय आइटी पेशेवरों और कंपनियों के सामने एक बार फिर बड़े संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन सांसद ग्लेन ग्रोथमैन द्वारा एक नया विधेयक (एच.आर. 10799) पेश किया गया है, जिसके तहत एच-1बी वीजा धारकों के लिए न्यूनतम वेतन सीमा को 60 हजार डालर से बढ़ाकर लगभग 1.40 लाख डालर करने का प्रस्ताव है। 1998 के बाद से अछूती रही इस सीमा में भारी बढ़ोतरी का यह कदम भारतीय आइटी कंपनियों और वहां कार्यरत हमारे युवाओं के भविष्य पर सीधा प्रहार कर सकता है।
दूसरी ओर, श्रम विभाग द्वारा काग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एडोब जैसी आठ प्रमुख तकनीकी कंपनियों के (प्रोग्राम इलेक्ट्रानिक रीव्यू मैनेजमेंट) 'पर्म' ग्रीन कार्ड आवेदनों पर रोक लगाने के बाद प्रवासी समुदाय में हड़कंप मच गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्लोबल आर्गेनाइजेशन आफ पीपल आफ इंडियन ओरिजिन (जीओपीआइओ) संगठन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को संरक्षित करने और निष्पक्ष नियम अपनाने की गुहार लगाई है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन कड़े और अनिश्चित फैसलों में सुधार नहीं किया गया, तो भारत की यह कुशल प्रतिभाएं कनाडा या यूरोप का रुख करने पर मजबूर हो जाएंगी, जो दोनों देशों के तकनीकी संबंधों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।
सोर्स- न्यूज एजेंसी आइएएनएस के अनुसार
