गूगल ने पहली बार अंतरिक्ष में भेजे एआई चिप्स, 1 साल तक चलेगा प्रोजेक्ट सनकैचर; पिचाई ने याद की पहली मीटिंग की बात
गूगल ने पहली बार अपने एआई चिप्स (टीपीयू) को 'प्रोजेक्ट सनकैचर' के तहत अंतरिक्ष में भेजा है, जिसका उद्देश्य सौर ...और पढ़ें

गूगल ने अंतरिक्ष में भेजे एआई चिप्स (सांकेतिक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गूगल ने पहली बार अपने एआई चिप्स को अंतरिक्ष में भेजा है। कंपनी ने 'प्रोजेक्ट सनकैचर' के तहत पहली बार अपने चार टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) एआई चिप्स को अंतरिक्ष में भेजा है। रेफ्रिजरेटर के आकार का यह प्रोटोटाइप सैटेलाइट स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या भविष्य में सूर्य के प्रकाश (सौर ऊर्जा) से चलने वाले एआई डेटा सेंटर अंतरिक्ष में काम कर सकते हैं या नहीं। यह हालिया लॉन्च इसी प्रोजेक्ट का पहला इन-ऑर्बिट (कक्षीय) परीक्षण है।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे एआई कंप्यूटिंग की दिशा में एक रोमांचक शुरुआत बताया है।
सुंदर पिचाई ने याद की पहली मीटिंग की बात
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए लिखा, "मुझे वह पहली बैठक अच्छी तरह याद है जब टीम ने अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग क्षमता स्थापित करने का विचार पेश किया था- कितना रोमांचक विचार था!"
उन्होंने आगे कहा कि प्लैनेट लैब्स के साथ यह सफल प्रक्षेपण "यह दर्शाता है कि हम कितना लंबा सफर तय कर चुके हैं... और अभी कितनी दूर जाना बाकी है।" इसके साथ ही उन्होंने इस सफल लॉन्च और एक और शानदार बूस्टर लैंडिंग के लिए स्पेसएक्स का आभार व्यक्त किया।
प्लैनेट लैब्स के सहयोग से निर्मित यह उपग्रह, स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 राइडशेयर मिशन पर 100 से अधिक अन्य पेलोड के साथ उड़ान भर रहा था। प्रोजेक्ट सनकैचर के प्रमुख ट्रैविस बील्स ने बाद में पुष्टि की कि टीम ने उपग्रह से संपर्क स्थापित कर लिया है और वह "अपेक्षित रूप से कार्य कर रहा है"।
15-15 मिनट की अंतराल पर चलाया जाएगा
एक बार पूरी तरह चालू हो जाने के बाद, सैटेलाइट में मौजूद टीपीयू गूगल के ओपन-वेट जेम्मा मॉडल के एक विशेष संस्करण को चलाएंगे। गर्मी और बिजली की सीमाओं को देखते हुए इन्हें 15-15 मिनट के अंतराल में चलाया जाएगा। गूगल का लक्ष्य इस मिशन को पूरे एक वर्ष तक चलाने का है।
यह उपग्रह सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में स्थित है, जहां इसके सोलर पैनल लगभग हमेशा धूप में रहते हैं और भारी बैटरियों की आवश्यकता नहीं पड़ती। पृथ्वी पर एआई डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत और स्थानीय विरोध के कारण इस कक्षीय कंप्यूटिंग के विचार को बढ़ावा मिल रहा है, जहां स्टारक्लाउड और स्पेसएक्स जैसे स्टार्टअप्स भी इस दिशा में काम कर रहे हैं।
वहीं, गूगल 81 उपग्रहों का एक समूह बनाने की योजना पर काम कर रहा है जो आपस में लेजर के माध्यम से संचार करेंगे और जिनका पहला परीक्षण 2027 में प्रस्तावित है। हालांकि, अंतरिक्ष में इन टीपीयू चिप्स के सुचारू संचालन के लिए तीव्र रेडिएशन और अत्यधिक गर्मी सबसे बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
