वाशिंगटन, एएनआइ। खगोलविज्ञानी तारों के ईर्द-गिर्द मौजूद रहने योग्य ग्रहों की खोज कर रहे हैं। इन क्षेत्रों को अक्सर ‘गोल्डीलॉक्स जोन’भी कहा जाता है, जिसका तापमान ग्रहों की सतह पर पानी के अस्तित्व के लिए अनुकूल होता है। दरअसल, खगोलविज्ञानियों का कहना है कि ऐसे तारे भी हैं, जो ‘गोल्डीलॉक्स स्टार्स’ कहलाते हैं। ये तारे न तो अधिक गर्म होते हैं और न ही अधिक ठंडे। इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि ये जीवन के अनुकूल ग्रहों के प्रतिकूल भी नहीं होते हैं।

शोधकर्ता एडवर्ड गिनीयन ने बताया कि ऐसे तारे जो थोड़ा ठंडा और सूर्य की तुलना में कम चमकीले होते हैं, उन्हें ‘के-ड्वार्फ’ (बौना) वर्ग में रखा जाता है और इन्हें ‘गोल्डीलॉक्स स्टार्स’ कहा जाता है। हमारी आकाशगंगा में सूर्य की तरह के-ड्वार्फ तीन गुना अधिक हैं। सूर्य की मिल्की वे आकाशगंगा से 100 प्रकाशवर्ष के दायरे में लगभग एक हजार के ड्वार्फ तारे मौजूद हैं। संतरे की रंग के इन तारों का अस्तित्व 15 से 45 अरब वर्ष पुराना है। वहीं, तुलनात्मक रूप से देखें, तो हमारा सूर्य पहले ही आधा जीवन पूरा कर चुका है, जिसका जीवनचक्र सिर्फ 10 अरब वर्ष ही है। सूर्य की इसी तेज दर के कारण पृथ्वी व्यापक रूप से अगले एक या दो अरब साल में रहने योग्य नहीं रह जाएगी।

गिनीयन ने बताया, ‘सूर्य जैसे तारे ग्रहों पर जीवन के अनुकूल वातावरण को सीमित कर देते हैं।’ यह इस वजह है कि अभी से एक अरब या उससे अधिक वर्ष बाद पृथ्वी सूर्य के रहने वाले क्षेत्र के सबसे गर्म या आंतरिक क्षेत्र के भीतर परिक्रमा करने लगेगी। इससे सूर्य अधिक गर्म और चमकीला होने लगेगा। इससे समुद्र और वातावरण खत्म होने के कारण पृथ्वी पर पानी पूरी तरह सूख जाएगा। सूर्य नौ अरब साल का होने पर असामान्य रूप से फैलने लगेगा और इसमें पृथ्वी को निगलने की क्षमता भी हो जाएगी।

विकिरण के प्रभाव में हैं तारे

अभी सूर्य के रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद ग्रह अपेक्षाकृत छोटे और तारे के करीब हैं। साथ ही, अल्ट्रा वायलेट विकिरण और एक्स-रे विकिरण के प्रभाव में हैं। जिसकी तीव्रता, पृथ्वी सूर्य से जितना अधिक प्राप्त करती, उससे हजार गुना अधिक हो सकती है। गिनीयन ने बताया, ‘हम एम-तारों के इर्द-गिर्द जीवन को लेकर अधिक आशावादी नहीं हैं।’ एम-तारे वे होते हैं, जिनका तापमान 2500 केल्विन से लेकर 3500 केल्विन तक होता है। केड्वार्फ में सामान्यतया सक्रिय चुंबकीय क्षेत्र नहीं होता है, जो शक्तिशाली अल्ट्रा-वायलेट किरणों का उत्सर्जन करते हैं।

के ड्वार्फ में हैं असीम संभावनाएं

शोधकर्ताओं के अनुसार, के-ड्वार्फ जीवन के लिए आदर्श जगह प्रतीत होते हैं और ये तारे ग्रहों पर जीवन विकास को पर्याप्त समय देते हैं। सूर्य (10 अरब वर्ष) के पूरे जीवन काल में के-तारे अपनी चमक को लगभग 10 से 15 फीसदी तक ही बढ़ा पाते हैं, जो जैविक विकास को पृथ्वी की तुलना में जीवन को विकसित करने के लिए अधिक समय देता है।

रहने के लिए अनुकूल होता है गोल्डीलॉक्स जोन

यह जीवन जीने के योग्य क्षेत्र होता है, जो किसी तारे के इर्द-गिर्द होता है। इस क्षेत्र में पानी न तो अधिक ठंडा और न ही अधिक गर्म होता है, जिससे उस ग्रह की सतह पर इसका अस्तित्व बना रहता है। उदाहरण के तौर पर, हमारी पृथ्वी स्वाभाविक तौर पर सूर्य का गोल्डीलॉक्स जोन है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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