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कई कैंसर से बचाव में मददगार हो सकती हैं जीएलपी-1 दवाएं

Published: Sat, 27 Jun 2026 09:15 PM (GMT+05:30)

वजन घटाने और डायबिटीज की जीएलपी-1 दवाएं कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव में मददगार हो सकती हैं। अध्ययनों से ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जीएलपी-1 दवाएं कैंसर के जोखिम को कम कर सकती हैं।

  2. स्तन कैंसर का खतरा 35% तक कम पाया गया।

  3. सूजन और इंसुलिन नियंत्रण से कैंसर सुरक्षा में योगदान।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। कैंसर को लेकर एक वर्ग की दवाओं में कुछ संभावनाएं देखी गई हैं। कई अध्ययनों के आधार पर यह दावा किया गया है कि वजन घटाने और डायबिटीज में काम आने वाली जीएलपी-1 दवाएं कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव में मददगार हो सकती हैं।

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल आंकोलाजी की एक बैठक में दो दर्जन से ज्यादा अध्ययनों को प्रस्तुत किया गया। इनके आधार पर बताया गया कि जीएलपी-1 का उपयोग नहीं करने वालों की तुलना में इस वर्ग की दवाएं लेने वाले मरीजों में कैंसर होने और बीमारी के बढ़ने का खतरा कम पाया गया है।

हालांकि, इन अध्ययनों में इस बात पर गौर नहीं किया गया कि जीएलपी-1 दवाओं का कैंसर के उपचार पर कैसे और किस तरह असर पड़ सकता है।

हालांकि, एक शोधकर्ता का मानना है कि ये दवाएं संभवत: सूजन कम करके, इंसुलिन नियंत्रित करके और ट्यूमर पर सीधे असर डालकर मरीजों की सुरक्षात्मक प्रणाली में योगदान दे सकती हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया की डा. एलिजाबेथ सुसैन मैकडोनाल्ड ने कहा, क्रानिक इन्फ्लेमेशन एक बायोलाजिकल प्रक्रिया है, जो कई तरह के कैंसर के बढ़ने में शामिल होती है।

मैकडोनल्ड के अनुसार, 11 हजार महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जीएलपी-1 का सेवन नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में इन दवाओं को लेने वाली महिलाओं में स्तर कैंसर का खतरा 35% कम पाया गया।

जबकि 12 हजार मरीजों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में भी इन दवाओं का संबंध फेफड़ों, स्तन, कोलेरेक्टल और लिवर के कैंसरों के कम खतरे से पाया गया है।