वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को एक ऐसा विधेयक पेश किया, जो एच--1बी वर्क वीजा में प्रमुख सुधारों से जुड़ा है। विधेयक में वीजा देते समय ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को प्राथमिकता देने को कहा गया है, जो अमेरिकी संस्थानों से पढ़े हों। अगर यह विधेयक कानून का रूप लेता है तो वहां पढ़ने वाले भारतीय छात्र लाभान्वित होंगे। एच--1बी वीजा गैर आव्रजक वीजा है जो अमेरिका में कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को ऐसे विशेषषज्ञता वाले पेशों में रोजगार देने की इजाजत देता है जिनमें खास तरह की सैद्धांतिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए कंपनियां इस वीजा सुविधा का उपयोग करती हैं। 

अमेरिका में दो लाख से अधिक भारतीय छात्र

गत एक अप्रैल को अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआइएस) ने कहा था कि प्रोद्यौगिकी क्षेत्र के विदेशी पेशेवरों के लिए आवश्यक एच-1बी वीजा के 2,75,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 67 फीसद से अधिक भारत से थे। अमेरिका प्रत्येक वर्ष 85,000 एच-1बी वीजा जारी करता है। जहां तक छात्रों की बात है तो अमेरिका में चीन के बाद सबसे अधिक छात्र भारत के हैं। अमेरिका में दो लाख से अधिक भारतीय छात्र हैं। प्रतिनिधि सभा और सीनेट में पेश किए गए 'एच-1बी एंड एल-1 वीजा रिफॉर्म एक्ट' के तहत यूएससीआइएस को पहली बार एच-1बी वीजा का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। 

अमेरिकी संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को प्राथमिकता  

नई प्रणाली के तहत एच-1बी वीजा के लिए उन प्रतिभाशाली छात्रों को प्राथमिकता दी दी जाएगी, जिन्होंने अमेरिकी संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। विधेयक में यह साफ तौर पर कहा गया है कि एच-1बी या एल-1 वीजाधारक किसी भी कीमत पर अमेरिकी कर्मचारियों का स्थान नहीं लेंगे। सीनेट में इस विधेयक को सीनेटर चक ग्रेसली और डिक डोबन ने पेश किया। प्रतिनिधिसभा में इसे बिल पासरेल, पॉल गोसार, रो खन्ना, फ्रैंक पलोन और लांस गूडेन ने पेश किया।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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