वाशिंगटन, एएनआइ। अमेरिका में फेस ट्रांसप्लांट कराने वाली पहली शख्स 57 वर्षीय कोनी कल्प ( Connie Culp )का निधन हो गया। वर्ष 2004 के सितंबर माह में ओहियो में पति ने कोनी के चेहरे पर फायरिंग की थी जिसके बाद उनकी जान तो बची लेकिन उनका चेहरा पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गया। बाद में 2008 को ट्रांसप्लांटेशन के जरिए करीब-करीब उनका पूरा चेहरा बदला गया। इसके लिए पूरे 22 घंटे तक सर्जन जुटे रहे और 77 स्क्वायर इंच के टिश्यू का इस्तेमाल कर पूरी प्रक्रिया को सफल बनाया। उस वक्त कोनी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छा गई थीं क्योंकि अमेरिका में फेस ट्रांसप्लांट कराने वाली पहली शख्स थीं। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के डॉक्टरों ने शुक्रवार को उनकी मौत की पुष्टि की।

अस्पताल की प्रवक्ता ने ट्विटर पर बताया कि एक संक्रमण के कारण उनकी मौत हो गई लेकिन यह संक्रमण फेस ट्रांसप्लांट से संबंधित नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया में फेस ट्रांसप्लांट के बाद सबसे अधिक दिनों तक जीवित रहने वाली महिला कोनी कल्प थीं। 

कोनी से पहले ट्रांसप्लांट के दुनिया में तीन ऐसे मामले सफल रहे। दो फ्रांस में और एक चीन में किया गया था। क्लिनिक के बायोएथिक्स डिपार्टमेंट के तत्कालीन चेयरमैन डॉक्टर एरिक कोडिश ने न्यूयार्क टाइम्स को बताया कि सर्जरी से पहले कनी क्लप का साइकोलॉजिकल टेस्टिंग किया गया।कनी कल्प का चेहरा हमले के बाद इतना अधिक भयंकर हो गया था कि उनके बच्चे भी उनसे डरने लगे थे और मॉन्सटर कहकर भागते थे।

कल्प 2004 में क्लीवलैंड क्लिनिक इलाज के लिए पहुंची थी। उनके पति को इस घटना के बाद सात साल के लिए कैद की सजा हो गई। 2008 में डॉक्टरों की टीम ने 22 घंटे की प्रक्रिया के तहत उनका चेहरा ठीक किया। इसके पहले उनके चेहरे की छोटी छोटी 30 सर्जरी की गई। ट्रांसप्लांट सर्जरी के कुछ सालों बाद कल्प उस महिला के परिवार से मिलीं जिसके डोनेशन के कारण उनका चेहरा ठीक हो पाया था। डोनर का नाम अन्ना कास्पर था और 2008 में हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई थी।

Posted By: Monika Minal

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