वाशिंगटन, एजेंसी। फिनलैंड और स्वीडन को औपचारिक रूप से नाटो (North Atlantic Treaty Organisation) की सदस्यता मिल चुकी है। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ रेटिफिकेशन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया, जिसके बाद दोनों देश नाटो के सदस्य बन गए। इस मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने गठबंधन की मजबूती को रेखांकित किया।

समाचार एजेंसी डीपीए की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह नाटो के विस्तार के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादातर सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया। नाटो (NATO) के 30 सदस्य देशों में से अमेरिका 23वां देश रहा, जिसने फिनलैंड और स्वीडन के विलय को मंजूरी दी है। 

बाइडन (Joe Biden) ने मंगलवार को दोनों देशों का नाटो में शामिल होने पर स्वागत किया और कहा कि हमारा गठबंधन अब पहले से कई ज्यादा एकजुट और करीब हो गया है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने नार्डिक देश फिनलैंड (Finland) और स्वीडन (Sweden) के नाटो में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया को मंजूरी दे दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह गठबंधन अब 32 देशों का हो चुका है, जो पहले की तुलना में सबसे अधिक शक्तिशाली होंगे।

रूस की नीतियों पर हमलावर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोप में शांति और सुरक्षा को तहस-नहस कर दिया है। बाइडन ने कहा कि ऐसे समय में जब रूस की तानाशाही व्यवस्था नियम आधारित प्रणाली को चुनौती दे रहे हैं, तब ट्रान्साटलांटिक गठबंधन की ताकत और नाटो के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो के अन्य सहयोगियों से जल्द से जल्द अनुसमर्थन प्रक्रियाओं को पूरा करने का आग्रह किया है। परिग्रहण प्रोटोकॉल लागू होने से पहले, दोनों देशों को नाटो के 30 सदस्य देशों द्वारा अनुमोदित किया जाना होगा।

गौरतलब है कि नाटो 30 देशों का दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षा समूह है। इसमें शामिल होने के लिए सभी देशों की सहमति जरूरी होती है। फिनलैंड और स्वीडन की सदस्यता को इस गठबंधन के अधिकतर देश मंजूरी दे चुके हैं। हालांकि, अभी तक तुर्की एकमात्र देश है जिसने परिग्रहण प्रक्रिया को अवरुद्ध किया है। तुर्की को लेकर संशय बरकरार है।

Edited By: Aditi Choudhary