वाशिंगटन, प्रेट्र। कोविड संक्रमण का पता चलने के लंबे समय बाद तक कई लोगों को क्रोनिक थकान व सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। क्रोनिक थकान एक चिकित्सकीय अवस्था है, जो अक्सर वायरल संक्रमण की वजह से पैदा होती है। यह कहना है उन विज्ञानियों का, जिन्होंने अपनी तरह के पहले अध्ययन में लांग कोविड व क्रोनिक थकान के संबंधों के बारे में पता लगाया है।

विज्ञानियों का अध्ययन निष्कर्ष जेएसीसी : हार्ट फेल्योर नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के दौरान विज्ञानियों ने पाया कि कोरोना संक्रमण के बाद कई लोग बिना अस्पताल में भर्ती हुए भी ठीक हो गए, लेकिन लंबे समय तक उनमें बीमारी का असर बना रहा।

23 से 69 साल के लोगों के बीच किया गया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने कहा, 'दरअसल, ये मरीज सार्स सीओवी-2 के पोस्ट एक्यूट सीक्वल से पीड़ित थे, जिसे लांग कोविड या लांग हालर्स कोविड भी कहा जाता है।' उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में सार्स सीओवी-1 महामारी के बाद भी लोगों ने गंभीर थकान, निर्णय लेने में परेशानी व अनिद्रा जैसी परेशानियों का सामना किया था।

हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कुल 41 मरीजों को शामिल किया, जिनमें 23 महिलाएं व 18 पुरुष थे। इनकी उम्र 23 से 69 साल के बीच थी।

गंभीर कोविड संक्रमण से उबरने के दौरान अन्य अंगों को पहुंच सकता है नुकसान

अमेरिका के माउंट सिनाई स्थित आइकन स्कूल आफ मेडिसिन में प्रोफेसर व अध्ययन की नेतृत्वकर्ता डोना एम. मैनसिनी कहती हैं, 'गंभीर कोविड संक्रमण से उबरने के दौरान अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। कई मरीज सांस लेने में परेशानी की शिकायत करते हैं, जिसके कारणों का पता लगाने के लिए कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्ट का प्रविधान है। इसमें कई विसंगतियां सामने आती हैं, जिनकी वजह से रोजाना की सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।'

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