सैन फ्रांसिस्को, आइएएनएस। लोकतंत्र में सोशल मीडिया के प्रभावों की जांच के लिए फेसबुक जल्द ही एक सर्वेक्षण कराएगा। फेसबुक ने घोषणा की है कि इस सर्वे के जरिये इस बात का भी पता लगाया जाएगा कि गलत सूचनाओं के प्रसार में तकनीकी प्लेटफॉर्मो की क्या भूमिका रहती है।

शोधकर्ताओं का हुआ चयन
वर्ष 2016 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव को रूसी अकाउंटों द्वारा प्रभावित करने के आरोप के बाद यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गहन जांच के दायरे में आ गया है। सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (एसएसआरसी) और एक स्वतंत्र समूह सोशल साइंस वन द्वारा कराए जाने वाले इस शोध के लिए विश्वभर के 11 देशों के 30 शैक्षणिक संस्थानों से 60 शोधकर्ताओं का चयन किया गया है।

चुनाव में मिलेगी मदद
फेसबुक के स्पेशल प्रोजेक्ट की वाइस प्रेसिडेंट इलियट श्रेज ने कहा ‘उम्मीद है कि हमारी यह पहल चुनाव और लोकतंत्र में सोशल मीडिया के योगदान के बारे में लोगों में गहन समझ पैदा करेगी। साथ ही, फेसबुक समेत अन्य कंपनियों को उनके व्यवसाय को सुधारने में मदद करेगी।’ कंपनी की स्ट्रेटिजिक इंटेंटिव्स मैनेजर छाया नायक ने इस संबंध में सोमवार को एक नोट के जरिए जानकारी साझा की है।

फेसबुक की जिम्मेदारी
फेसबुक का कहना है कि किसी व्यक्ति या प्रोजेक्ट को चुनने में उसका कोई रोल नहीं है। साथ ही जो शोध वह करने जा रहा है उसमें न तो उसके निष्कर्ष में भी उसकी कोई भूमिका होगी, ना ही वह इस संबंध में किसी को कुछ निर्देश देगा।

एसएसआरसी ने कहा ‘फेसबुक की यह गारंटी हमें यह समझाने में सहायता करेगी कि सोशल मीडिया में कैसे राजनीतिक खबरें साझा की जाती हैं और दुष्प्रचार किस प्रकार लोगों को प्रभावित करता है। इसके अलावा इस अध्ययन के जरिये यह भी पता चलेगा कि परंपरागत समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया के बीच क्या संबंध है।’ 

Posted By: Dhyanendra Singh

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