वाशिंगटन, एपी। चीन में कोरोना वायरस फैलाने के दो माह बाद भी वैज्ञानिकों को नहीं पाता कि कोरोना वायरस (कोविड-19) कितना घातक है। यह वायरस चीन के बाहर दक्षिण कोरिया, जापान, ईरान, बहरीन और इटली तक में लोगों की जान ले रहा है लेकिन, इसकी घातकता को लेकर शोध अभी जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के डॉ. ब्रुस आयलवर्ड का कहाना है कि आपको बहुत बुरे नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए, जब तक कि आ इसे रोकने का कोई उपाय नहीं तलाश लें।

आकंड़ों पर नजर डालें तो इस संक्रमण का केंद्र रहे वुहान में चार फीसद तक मरीज इस संक्रमण के कारण जान गंवा बैठे, जबकि चीन के ही दूसरे हिस्सों में महज 0.7 फीसद संक्रमित मरीजों की जान गई। विशेषज्ञों ने पाया कि कोनोरा वायरस के हमले की प्रकृति एक स्थान से दूसरे स्थान में बदली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा स्वास्थ्य सुविधाओं और इलाज के अलग प्रोटोकॉल के कारण संभव है।

आयलवर्ड ने बताया कि निश्चित रूप से इस बीमारी से होने वाली मृत्यु दर ज्यादा नहीं है लेकिन, लोग तो मर ही रहे हैं। एक और चौंकाने वाली बात भी सामने आई है। जो लोग नियमित रूप से यात्रा करते हैं उनके जल्द स्‍वस्‍थ्‍य होने की संभावना ज्यादा होती है। यह भी पाया गया है कि औसत रूप से संक्रमित मरीज दो हफ्ते में सही हो जाते हैं, हालांकि गंभीर रूप से संक्रमित मरीज तीन से छह हफ्ते में सही हो सकते हैं।

इस बीच कोरोना की चपेट में दुनियाभर के कई देशों के आने से वैश्विक कारोबार में गिरावट की आशंका जाहिर की जा रही है। कोरोना की वजह से दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और अमेरिका के कारोबार में सुस्ती के आसार हैं जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है। रिसर्च एवं रेटिंग एजेंसी मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर में कोरोना की वजह से इस साल 0.4 फीसद की गिरावट हो सकती है। पहले वर्ष 2020 के लिए वैश्रि्वक विकास दर में 2.8 फीसद की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था जिसे घटाकर अब 2.4 फीसद कर दिया गया है।  

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

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