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होर्मुज टोल वसूली पर 24 घंटे में ही पलटे ट्रंप, बोले- फीस नहीं लेंगे, खाड़ी देशों से होगी डील

Published: Tue, 14 Jul 2026 09:44 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टोल वसूली का फैसला वापस ले लिया है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ट्रंप ने होर्मुज टोल वसूली का फैसला वापस लिया

  2. खाड़ी देश अमेरिका के साथ बड़े निवेश समझौते करेंगे

  3. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज में सैन्य तनाव बढ़ा

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% टोल की नीति को वापस ले रहे हैं।

ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि मध्य पूर्व के नेताओं के साथ बहुत ही सार्थक बातचीत के आधार पर मैंने अमेरिका की 20% रीइम्बर्समेंट फीस (वसूली शुल्क) को व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। खाड़ी के विभिन्न देश अमेरिका के साथ करेंगे निवेश करेंगे। ये निवेश बहुत बड़े होंगे और ये समझौते मध्य-पूर्वी देशों और उनके भविष्य के लिए बेहद फायदेमंद होंगे।

ईरान के दर्जनभर ठिकानों पर बमबारी

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज पर कब्जे की लड़ाई एक बार फिर शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जोरदार हमले और जवाबी हमले का दावा किया है। होर्मुज स्ट्रेट में यूएई के दो व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार को हमलों का नया दौर शुरू करते हुए दर्जनभर ठिकानों पर बमबारी की। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते घमासान के चलते पिछले महीने तय हुए युद्धविराम समझौते (एमओयू) के अस्तित्व पर संकट छा गया है।

ट्रंप के फैसले का मजाक

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने की एवज में खाड़ी देशों से 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने की बात से पीछे हट गए हैं। एपी के अनुसार, उन्होंने कहा कि इसकी बजाय खाड़ी देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करके भरपाई करेंगे। संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत कई देशों ने इस योजना का विरोध किया है। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने उन्होंने ट्रंप के इस फैसले का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि ट्रंप अमेरिका को डकैती के लिए तैयार कर रहे हैं।

ईरान पर लगातार पांच घंटे तक बम बरसाए

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि मंगलवार को ईरान पर लगातार पांच घंटे तक बम बरसाए गए। सेंटकाम ने कहा कि ईरान के तटीय डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन साइटों और मैरिटाइम क्षमताओं पर हमले किए गए। सेंटकाम ने कहा कि ये हमले आगे भी जारी रहेंगे ताकि ईरानी बलों को भारी कीमत चुकानी पड़े और उनकी निर्दोष नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हमले की क्षमता कमजोर की जाए।

नाकेबंदी लागू की जा रही: ट्रंप

हमलों के कुछ देर बाद ही राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर एक और भीषण हमला किया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान के खिलाफ फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू की जा रही है। सेंटकाम ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के रास्तों पर चलने वाले सभी जहाजों को सलाह दी है कि वे 'नोटिस टू मैरिनर्स' प्रसारण पर नजर रखें और 'ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16' पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें। कमांड ने यह भी कहा कि व्यापारिक जहाजों के लिए आगे की विस्तृत जानकारी एक औपचारिक नोटिस के जरिए जारी की जाएगी।

ईरानी मीडिया ने बताया कि कई शहरों पर अमेरिकी हमले हुए, जिसमें चार लोग घायल हुए हैं। सेंटकाम ने एक्स पर जानकारी दी कि ईरान के बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबादान, किश, केशम और अबू मूसा द्वीपों पर भारी बमबारी की गई। वहीं बुशहर के जाम शहर और जोगडक में कई धमाके सुने गए। इसके अलावा दक्षिण पश्चिम ईरान के खुजेस्तान में भी अमेरिकी मिसाइलें गिरीं।

एपी के अनुसार, आइआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में मंगलवार को नस्र 2 सैन्य अभियान चलाया गया। इसके तहत जार्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। जार्डन पर अमेरिकी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। जार्डन की तरफ से बताया गया कि चार ईरानी मिसाइल हमलों को विफल किया गया है। वहीं, बहरीन में स्थित अमेरिकी अड्डों पर भी मिसाइल से हमला हुआ। बहरीन में तीन बार सायरन बजे। कुवैत में भी अमेरिका के क्रूज मिसाइल ठिकानों पर हमले हुए। साथ ही, एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को होर्मुज के ऊपर मार गिराया गया।

ट्रंप ने नहीं दोहराई पिछली गलती

एएनआइ के अनुसार, ट्रंप ने 10 जुलाई को सीनेट के कार्यवाहक अध्यक्ष चक ग्रासले को भेजे पत्र में बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान सात जुलाई से फिर शुरू हो गया है। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से लागू युद्धविराम समाप्त होने के बाद उठाया गया। पिछली बार उन्होंने ईरान पर हमले की जानकारी कांग्रेस को नहीं दी थी, जिसके चलते उनकी काफी आलोचना हो रही थी।

अमेरिकी प्रशासन ने यह सूचना 1973 के वार पावर्स रिजोल्यूशन के तहत कांग्रेस को दी है, जिसके अनुसार किसी भी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के 48 घंटे के भीतर राष्ट्रपति को कांग्रेस को सूचित करना अनिवार्य होता है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान निकालने के लिए गंभीर प्रयास किए थे और पिछले महीने दोनों देशों के बीच एक समझौता भी हुआ था। लेकिन ईरान द्वारा तीन तेल टैंकरों पर हमला कर समझौते का उल्लंघन करने के बाद अमेरिका को फिर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। पत्र भेजने के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई 90 प्रतिशत तक खत्म हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान का सबकुछ तबाह कर दिया है।