नई दिल्ली [न्यूयार्क टाइम्स]। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हवाई हमले में मारे गए ईरानी कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को 'राक्षस' (monster) कहा था। ट्रंप ने कहा कि अमरीका ने सुलेमानी को मारकर कई मासूम लोगों की जान बचाई है।

संभावित हमले से डर रहा था अमेरिका 

सुलेमानी के मारे जाने पर ट्रंप ने कहा कि वो एक राक्षस था, वो मर गया, वो हमारे खिलाफ एक बड़ा और बुरा हमला करने की तैयारी कर रहा था, मुझे नहीं लगता कि सुलेमानी के मारे जाने के बारे में कोई शिकायत कर सकता है। दरअसल इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को खुफिया विभाग से जानकारी मिली कि सुलेमानी अमेरिका पर हमले की रणनीति बना रहा है। इस तरह की सूचना मिलने के बाद अमेरिका ने सुलेमानी पर नजर रखनी शुरू की। 

इसी बीच शुक्रवार को उन्हें पता चला कि सुलेमानी बगदाद से आने वाला है। अमेरिका अपने ड्रोन से सुलेमानी के हर मूवमेंट की निगरानी कर रहा था। इसी दौरान जब वो बगदाद एयरपोर्ट से उतरकर कार से जा रहे थे, तभी इस ड्रोन से उनके काफिले पर हमला किया गया, इस हमले में सुलेमानी और उनके साथ चल रहे अन्य लोगों की मौत हो गई।

अंगूठी से हुई पहचान

अमेरिकी ड्रोन के हमले से गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। वो जिस गाड़ी में सवार थे वो बुरी तरह से नेस्तोनाबूत हो गई। सुलेमानी के साथ मौजूद लोगों के भी परखच्चे उड़ गए। गाड़ी में कितने लोग सवार थे, किन-किनकी मौत हो गई? इसके बारे में कोई बताने वाला नहीं था। आखिर में टीम को एक हाथ मिला जिसकी उंगली में एक कीमती अंगूठी थी। इसी अंगूठी की बदौलत सुलेमानी की पहचान हो सकी। दरअसल जिस हाथ में अंगूठी मिली वैसी ही सुलेमानी भी पहना करते थे। 

सुलेमानी को सैकड़ों अमेरिकी मौतों के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा अमेरिका

दरअसल 26/11 के हमले के बाद अमेरिका मुस्लिम देशों से काफी डरा हुआ है। खासकर उन देशों से जहां आतंकी गतिविधियां हो रही है या वहां पर अमेरिका को लेकर किसी तरह का विरोध है। अमेरिका जनरल सुलेमानी को सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों की मौतों के लिए जिम्मेदार मानता है। इसी के साथ अमेरिका को ये भी लग रहा था कि सुलेमानी अमेरिका पर और भी हमले की योजना बना रहा है।

वो अपने संसाधनों और प्रभाव का प्रयोग करते हुए अमेरिकी ठिकानों या अमेरिका में किसी भी तरह से हमला करा सकता है। ये आत्मघाती या किसी और तरह का हमला हो सकता है। किसी के दिमाग में क्या चल रहा है ये पढ़ पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। चूंकि सुलेमानी ईरान में काफी कद्दावर नेता थे और उनके समर्थकों की लंबी फौज है इस वजह से उनसे अधिक खतरा महसूस हो रहा था। इसी के बाद से अमेरिका ने उन पर खास ड्रोन से निगाह रखनी शुरू की और हमला करके मौत के घाट उतार दिया। 

Posted By: Vinay Tiwari

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