नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर भड़के ट्रंप, कहा- यह नॉर्वे पर कभी न मिटने वाला कलंक है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़क उठे हैं। उन्होंने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार ...और पढ़ें
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप।
HighLights
ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के।
नवी पिल्लई के चयन को शर्मनाक, अपमानजनक बताया।
नॉर्वे पर 'कभी न मिटने वाला कलंक' करार दिया।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़क उठे हैं। उन्होंने इस साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दक्षिण अफ्रीका की पूर्व जज और मानवाधिकार न्यायविद नवी पिल्लई के चयन को बेहद शर्मनाक और अपमानजनक करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि इस फैसले ने नॉर्वे देश पर एक कभी न मिटने वाला कलंक लगा दिया है।
किसे मिला है इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार?
बता दें कि युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के खिलाफ आजीवन संघर्ष करने वाली जानी-मानी दक्षिण अफ्रीकी जज और मानवाधिकार नेता नवी पिल्लई को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक, एक डिप्लोमा और 12 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि मिलती है।
डोनाल्ड ट्रंप का फूटा गुस्सा
पिल्लई को ये पुरस्कार मिलने के बाद डोनल्ड ट्रंप ने नोबेल समिति पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैंने तो इस शख्स का नाम तक नहीं सुना था... ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि मैंने इस खास शख्सियत के बारे में कभी नहीं सुना था, फिर भी बधाई हो।
अपने पोस्ट में आगे ट्रंप ने खुलकर अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका को जिसका प्रतिनिधित्व मैं आपके राष्ट्रपति के रूप में कर रहा हूं, नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला।
ट्रंप ने नॉर्वे को बताया कलंक
इसके साथ ही ट्रंप ने ओस्लो स्थित नॉर्वे की नोबेल समिति पर हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला नॉर्वे देश पर एक ऐसा कलंक है जो कभी नहीं मिटेगा। उन्होंने समिति के सदस्यों को कट्टर विचारधारा वाले लोग, जो लोकतंत्र विरोधी और सभ्यता के दुश्मन हैं करार दिया।
क्यों कटा था ट्रंप का पत्ता?
इस बात को ऐसे समझिए कि जनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में दोबारा लौटने के बाद से ही डोनल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार पाने की अपनी इच्छा को छिपाते नहीं रहे हैं। हालांकि, ओस्लो के विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी कुछ नीतियों और बयानों की वजह से वे इस रेस से बाहर हो गए थे।
- ईरान के खिलाफ कड़ा रुख और युद्ध के हालात।
- ग्रीनलैंड जैसे इलाकों को लेकर क्षेत्रीय विस्तार की महत्वाकांक्षाएं।
- प्रवासियों पर बेहद सख्त नीतियां।
- बहुपक्षवाद और मीडिया पर लगातार हमले।
विजेता नावी पिल्ले का मजेदार तंज
गौरतलब है कि पुरस्कार की घोषणा के बाद नवी पिल्लई ने भीड़ के सामने एक हल्का-फुल्का मजाक भी किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आप लोग थोड़ा और ताली बजाएंगे, तो शायद मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ शेयर कर सकती हूं।
उनका यह तंज पिछले साल की उस घटना की तरफ इशारा था, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने नोबेल जीतने के बाद अपना स्वर्ण पदक डोनल्ड ट्रंप को सौंप दिया था। फिलहाल, नोबेल समिति के इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है, और ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
