हूतियों से बचने के लिए गुहार लगाते रहे सऊदी प्रिंस, लेकिन ट्रंप ने नहीं उठाया फोन; लड़ाकू विमान भेजने से इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के हूती विद्रोहियों पर सीधे हवाई हमले के आग्रह को दो बार ठुकरा दिया।

ट्रंप ने नहीं उठाया सऊदी प्रिंस का फोन कॉल।
HighLights
ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस के हूती हमले के आग्रह को ठुकराया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यमन संघर्ष में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया।
अमेरिका लाल सागर में नेविगेशन स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका और पश्चिम एशिया की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के फोन कॉल को दो बार अस्वीकार कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी प्रिंस चाहते थे कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे हवाई हमले करे, लेकिन ट्रंप ने फिलहाल ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया है।
समझिए क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही वे हनिश द्वीपों की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, जिससे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक 'बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य' पर एक बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
वहीं मोखा शहर उस जलडमरूमध्य से केवल 80 किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे होकर दुनिया भर का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार और सामान गुजरता है। हूती लड़ाकों के आगे बढ़ने से सऊदी समर्थित यमन सरकार की फौज पीछे हटने को मजबूर हो गई है।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से क्या मांग की थी?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यमन के मोखा शहर में जब हूती सेना तेजी से आगे बढ़ रही थी और सऊदी समर्थित यमन की सेना पीछे हट रही थी, तब हालात की गंभीरता को देखते हुए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया।
प्रिंस ने दो बार किया था कॉल
मिली जानकारी के अनुसार पहला कॉल गुरुवार को एमबीएस (MBS) ने बिगड़ते हालात की जानकारी देने के लिए किया था। इसके कुछ घंटों बाद प्रिंस ने दोबारा फोन किया और ट्रंप से अपील की कि अमेरिका सीधे हूती विद्रोहियों पर सैन्य हमले करे।
अब समझिए ट्रंप ने क्यों ठुकरा दी मांग?
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी प्रिंस के सीधे सैन्य दखल के आग्रह को ठुकरा दिया। इसके पीछे अमेरिका की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। इस रणनीति को ऐसे समझा जा सकता है कि अमेरिका का फिलहाल यमन के संघर्ष में सीधे तौर पर उतरने का कोई इरादा नहीं है।
वहीं एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका की पहली और एकमात्र प्राथमिकता लाल सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।
क्या चाहता है अमेरिका?
अमेरिका चाहता है कि इस तरह की क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और क्षेत्रीय भागीदार देश खुद आगे आएं और मोर्चा संभालें। हालांकि, अमेरिका सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ खुफिया जानकारी और टार्गेटिंग डेटा जरूर मुहैया कराएगा।
