'जो एआई तकनीक हमारे नियंत्रण में न रहे, उसका विकास बेमतलब', सत्या नडेला कि गंभीर चेतावनी
माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्या नडेला ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विकास ऐसा होना चाहिए, जिस पर इंसानों का नियंत्रण बना रहे।

माइक्रोसॉफ्ट सीईओ बोले- भारत में एआई का फायदा हर व्यक्ति तक पहुंचे
HighLights
अमेरिका और चीन को मिलकर तय करने होंगे एआई के नियम-कायदे
माइक्रोसॉफ्ट सीईओ बोले- भारत में एआई का फायदा हर व्यक्ति तक पहुंचे
आईएएनएस, सिएटल। माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्या नडेला ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विकास ऐसा होना चाहिए, जिस पर इंसानों का नियंत्रण बना रहे।
उन्होंने सरकारों और तकनीकी कंपनियों के बीच मिलकर अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने की जरूरत बताई और कहा कि इसके लिए अमेरिका और चीन के बीच समझ बनना एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम हो सकता है।
सिएटल में गुरुवार को आयोजित ‘आइडियाज4इंडिया’ फोरम में नडेला ने कहा कि एआइ की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इसे नियंत्रित करने और इसके इस्तेमाल को लेकर कई अहम सवाल अब भी अनसुलझे हैं। उनके मुताबिक, एआई के विकास का मूल उद्देश्य लोगों के काम आना और उस पर मानव नियंत्रण बनाए रखना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “कोई भी ऐसी तकनीक जो इंसानों के काम न आए या जिस पर इंसानों का नियंत्रण न हो, उसे विकसित करने का कोई मतलब नहीं है।”
भारत के लिए उपयोगी हो एआइनडेला ने तकनीकी क्षेत्र के नेताओं से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि एआइ का लाभ भारत के किसानों, कारोबारियों और अलग-अलग समुदायों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी सामान्य उपयोग वाली तकनीक की सफलता इस बात से तय होगी कि कितने लोग उसका इस्तेमाल कर पाते हैं और उसके विकास में योगदान दे पाते हैं।
नडेला के मुताबिक, दुनिया तभी इस तकनीक का व्यापक लाभ उठा सकेगी, जब सभी देशों और क्षेत्रों को इससे जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिले और वे इसके विकास में योगदान कर सकें।
इस दौरान भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से आयोजित ‘इंडियन अमेरिकन टेक सीईओ फोरम’ में भारतीय मूल के 40 से अधिक सीईओ और सीटीओ शामिल हुए।
बैठक में एआइ के साथ क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज साफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
आम भारतीय के काम आए एआई : क्वात्रा
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत में एआइ को अपनाने का आधार इसके व्यावहारिक फायदे होंगे। उन्होंने कहा कि इसके नतीजे कितने उपयोगी हैं और समाज तथा बुनियादी ढांचा उन्हें कितना समर्थन देते हैं, इसी से एआई की स्वीकार्यता तय होगी। उन्होंने आगाह किया कि भारत में अमेरिकी एआई मॉडलों को ज्यों का त्यों अपनाना जरूरी नहीं कि सफल हो।
उन्होंने छोटे दुकानदार का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई एआइ सेवा उसके लिए करीब 300 रुपये महीने में उपलब्ध हो और उससे कारोबार में वास्तविक फायदा हो, तभी वह उसे अपनाएगा।
उनके मुताबिक, जो तकनीक बे एरिया और सिएटल में काम करती है, जरूरी नहीं कि वही भारत में भी सफल हो। भारत में एआई का विस्तार अंततः इस बात पर निर्भर करेगा कि वह आम लोगों और कारोबारियों के लिए कितना उपयोगी साबित होता है।
