न्यूयार्क, आइएएनएस। नॉवेल कोरोना वायरस ( novel coronavirus) से जूझने के क्रम में शोधकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसके अनुसार, घातक वायरस के चपेट में आने के बाद गर्भवती महिलाओं या फिर जो महिलाएं बर्थ कंट्रोल के लिए एस्ट्रोजन ले रही हैं उनमें ब्लड क्लॉट का खतरा अधिक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नॉवेल कोरोना वायरस SARS-CoV-2 के पैथेलॉजिकल प्रभाव असामान्य साबित हुए हैं। इसके साथ ही ही इस बीमारी के कारण फेफड़े, किडनी, हार्ट व अन्य अंगों को भी नुकसान होता है।

एस्ट्रोजन से प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लॉड क्लॉट होने के चांस बढ़ जाते हैं और महिलाओं में बर्थ कंट्रोल गोलियां या हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरैपी से भी इस बीमारी का खतरा है। COVID-19 से संक्रमण के काण इन महिलाओं में ब्लड क्लॉट का खतरा अधिक होता है और इन्हें एंटीकोएगुलेशन थेरैपी ( anticoagulation therapy) लेनी पड़ सकती है या अपनी एस्ट्रोजन की दवाएं छोड़नी पड़ेंगी। 

शोध की मानें तो ये ब्लड क्लॉट्स उनकी जान ले सकते हैं। इन ब्लड क्लॉट को थ्रोंबोसिस कहा जाता है। इन क्लॉटस की वजह से फेफड़ों में सूजन पैदा हो जाती है और वायरस से शिकार मरीज का शरीर सामान्य प्रतिक्रिया के तौर पर फेफड़ों में सूजन पैदा करता है। पूरी दुनिया में मरीजों को इस वायरस की वजह से कई तरह की दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शोध की मानें तो ये ब्लड क्लॉट्स उनकी जान ले सकते हैं। इन ब्लड क्लॉट को थ्रोंबोसिस कहा जाता है। इन क्लॉटस की वजह से फेफड़ों में सूजन पैदा हो जाती है और वायरस से शिकार मरीज का शरीर सामान्य प्रतिक्रिया के तौर पर फेफड़ों में सूजन पैदा करता है।

पूरी दुनिया में मरीजों को इस वायरस की वजह से कई तरह की दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मई में बीबीसी द्वारा प्रकाशित आलेख के अनुसार, जब मार्च महीने में संक्रमण पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा था तब अस्पताल में भर्ती ऐसे अनेकों मरीज मिले जिन्हें ब्लड क्लॉड से काफी परेशानी हो रही थी। संक्रमण के बारे में डॉक्टरों को और भी कई हैरत में डालने वाली बातों का पता चला जैसे कुछ मरीजों के फेफड़ों में माइक्रो-क्लॉट भी पाए गए थे।

Posted By: Monika Minal

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