बोस्टन, प्रेट्र। अनियमित खानपान और सोने की आदतों के कारण हमारा वजन बढ़ सकता है। इससे कई बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि कैलोरी को बर्न भी करते रहें। इसके लिए हमें अपनी दिनचर्या में बदलाव करने की जरूरत है, खासकर कि खाने की आदत में। एक नवीन अध्ययन में सामने आया है कि हम कितनी कैलोरी बर्न करते हैं इस पर हमारे खाने के समय का असर पड़ता है। अमेरिका स्थित बर्मिंघम एंड वूमंस हॉस्पिटल और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में सामने आया है कि सुबह के घंटों की तुलना में दोपहर बाद और शाम की शुरुआत में 10 फीसद अधिक कैलोरी बर्न होती है।

कई कारणों से अपना लेते हैं अनियमित जीवनशैली

करेंट बायोलॉजी नामक जर्नल में इस अध्ययन के निष्कर्षों को प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि मेटाबॉलिज्म पर हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी का खासा असर पड़ता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि व्यक्ति के काम की शिफ्ट व अन्य कारणों से वह अनियमित खानपान और सोने की आदत अपना लेता है, जिसके परिणामस्वरूप उसका वजन बढ़ने लगता है।

इस अध्ययन में शामिल किर्सी-मारजा जिटिंग के मुताबिक, हमारे अध्ययन में सामने आया कि किसी कार्य को किसी एक समय में करने के स्थान पर किसी दूसरे समय में करने पर उसका असर हमारी कैलोरी बर्न करने की दर पर पड़ता है। हमारे अध्ययन के ये निष्कर्ष हैरान करने वाले थे। अध्ययन में पता चला कि अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव कर अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं, जिससे अपने वजन को नियंत्रण में रख सकते हैं।

यह आया सामने

शोधकर्ताओं के मुताबिक, हमने अलग-अलग समय में प्रतिभागियों के मेटाबॉलिज्म की दर को मापा। इसमें सामने आया कि सुबह में यह दर अधिकतम और शाम को न्यूनतम थी। बर्मिंघम एंड वूमंस हॉस्पिटल की जीन डफी कहते हैं, अध्ययन से हमें स्पष्ट रूप से पता चला कि हम कितनी ऊर्जा बर्न करेंगे यह सिर्फ क्या खा रहे हैं इस पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि कब खा रहे हैं इस पर भी निर्भर करता है। डफी के मुताबिक, खाने और सोने जैसी आदतों को नियमित करके हम अपनी कैलोरी को अधिक बर्न कर सकते हैं।

इस तरह किया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में सात लोगों को शामिल किया। उन्हें एक प्रयोगशाला में रखा गया, जहां घड़ी, खिड़की, फोन या इंटरनेट नहीं था। इसकी वजह यह थी कि उन्हें बाहर क्या समय है इसका पता न चल सके। प्रतिभागियों के सोने और उठने का समय शोधकर्ताओं ने तय किया। शोधकर्ता हर रात सोने का समय चार घंटे आगे बढ़ा देते। इस तरह का प्रयोग तीन सप्ताह तक चला। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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