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हैकर ने AI एजेंट्स के जरिए 100 से अधिक कंपनियों में लगाई सेंध, जानिए कैसे दिया बड़े साइबर हमले को अंजाम

Published: Tue, 20 Oct 2026 08:41 AM (IST)

एक चीनी भाषी हैकर ने ऑटोनॉमस एआई एजेंटों का उपयोग करके दुनिया भर की 100 से अधिक कंपनियों की वेबसाइटों ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। साइबर सुरक्षा की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक बेहद खतरनाक और नया रूप सामने आया है। एक चीनी भाषी साइबर अपराधी ने खुद कोई जटिल कोड लिखे बिना, सिर्फ ऑटोनॉमस एआई एजेंटों की मदद से दुनिया भर की 100 से अधिक बड़ी कंपनियों की वेबसाइटों में सफलतापूर्वक सेंध लगा दी।

शिकार बनने वाली कंपनियों में कृषि उपकरण निर्माता डीयर, घरेलू उपकरण बनाने वाली शार्कनिंजा, और इंजन निर्माता कमिन्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि हैकर ने खुद लगभग कोई तकनीकी काम नहीं किया, बल्कि पूरी हैकिंग की प्रक्रिया को ऑटोनॉमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स के हवाले कर दिया।

AI एजेंट्स को सौंपा गया हैकिंग का काम

साइबर सुरक्षा कंपनी नॉरफोर्ज के प्रिंसिपल थ्रेट रिसर्चर स्नोरे फैगरलैंड ने इस पूरी घुसपैठ की निगरानी की। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी ने ऑटोनॉमस AI टूल्स को घंटों तक स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया, जिन्होंने अपने स्तर पर वेबसाइटों की पड़ताल की और खामियां ढूंढ़कर सिस्टम में सेंध लगाई।

फैगरलैंड को इस गतिविधि का सुराग तब मिला जब वे इंटरनेट पर केयर्न नामक ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म के खुले इंस्टेंस की जांच कर रहे थे। 2 अक्टूबर के आसपास उन्हें केयर्न के ऐसे करीब दो दर्जन सिस्टम मिले जिनका उपयोग अवैध साइबर गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

इससे फैगरलैंड को यह लाइव देखने का मौका मिला कि हैकर किस तरह AI के जरिए हमलों को अंजाम दे रहे थे। रॉयटर्स के अनुसार, केयर्न डेटा का स्वतंत्र विश्लेषण करके पीड़ित कंपनियों के नामों की पुष्टि की है।

पीड़ित कंपनियों का रुख

हमलों के बाद पीड़ित कंपनियों ने नुकसान को सीमित करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। दिग्गज कृषि उपकरण निर्माता कंपनी डियर ने बताया कि उसने घटना के तुरंत बाद जरूरी उपचारात्मक कदम उठाए हैं और किसी भी संवेदनशील जानकारी के चोरी होने का कोई संकेत नहीं मिला है।

शार्कनिंजा के अनुसार, यह हमला एक अलग वेबसाइट पर हुआ था जिसमें केवल प्रोडक्ट सपोर्ट से जुड़ी जानकारी रखी गई थी, और अब इस खतरे पर काबू पा लिया गया है।

वहीं, कमिंस ने कहा है कि वह अपने एक थर्ड-पार्टी वेंडर द्वारा संचालित वेबसाइट पर हुए संभावित हमले की विस्तृत जांच कर रही है। इसके अलावा दो अन्य छोटे कारोबारियों ने भी अपने सिस्टम में सेंधमारी की बात स्वीकार की है।

मामूली निर्देश और 50 डॉलर प्रति हैक का खर्च

फैगरलैंड के अनुसार, इस चीनी भाषी हैकर ने 25 सितंबर से अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान की ई-कॉमर्स साइटों पर हमलों की शुरुआत की थी। हैकर ने इन AI एजेंट्स को 100 से भी कम चीनी शब्दों में बेहद संक्षिप्त निर्देश दिए थे। इसके बाद इन टूल्स ने करीब 1,200 वेबसाइटों पर घुसपैठ की कोशिश की, जहां एक सफल हमले में लगभग 23 घंटे की स्वायत्त खोजबीन लगी।

इस साइबर हमले में चीन के डीपसीक और एंथ्रोपिक के क्लॉड कोड जैसे टूल्स के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। पूरे अभियान में लगभग $5,000 मूल्य के कंप्यूटिंग टोकन खर्च हुए, जिसका अर्थ है कि प्रति सफल हैक की लागत महज $50 के आसपास आई।

एक मामले में जब कंपनी के मुख्य पोर्टल पर कोई कमी नहीं मिली, तो AI एजेंट्स ने खुद अन्य डिजिटल रिकॉर्ड खंगालकर एक सार्वजनिक कंट्रोल पैनल खोजा और उसकी कोडिंग की सूक्ष्म खामी का फायदा उठाकर सर्वर पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

बिना मानवीय निगरानी के हमलों का नया दौर

केयर्न प्लेटफॉर्म के डेवलपर le1xia0 ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि यह मल्टी-एजेंट आर्किटेक्चर हैकिंग के लिए नहीं बनाया गया था और यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है तो यह उनका उद्देश्य नहीं था।

हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऑटोनॉमस एजेंट्स को इंसानी देखरेख की भी जरूरत नहीं रह गई है। हाल ही में दक्षिण कोरिया, जापान और पश्चिमी देशों में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां साइबर अपराधी AI की मदद से भारी मात्रा में क्रेडिट कार्ड डेटा और कॉर्पोरेट सिस्टम तक पहुंच बना रहे हैं।

फैगरलैंड के अनुसार, साइबर अपराध का यह नया दौर है जहां एक अकेला व्यक्ति भी AI की असीमित क्षमता का उपयोग करके दुनिया भर की कंपनियों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है।

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