वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका के चीनी राजदूत कुई तियानकोई ने कहा कि अमेरिका के लिए वाणिज्‍य दूतावास बंद करना वास्‍तव में दुर्भाग्‍यपूर्ण था। उन्‍होंने कहा कि बीजिंग को वाशिंगटन के फैसले पर प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया गया था। राजदूत ने कहा कि बीजिंग इस मुद्दे पर वाशिंगटन से टकराव से बचने की उम्‍मीद करता है। चीनी राजदूत ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान कहा कि मुझे नहीं लगता कि एक नया शीत युद्ध किसी के हित में होगा। बता दें कि अमेरिका ने पिछले महीने आरोपों पर जासूसी को लेकर चीन को ह्यूस्टन में अपना वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया था। चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका को चेंगदू में अपना वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया।

अमेरिका और चीन के रिश्‍तों में आए तनाव के लिए वॉशिंगटन जिम्‍मेदार 

24 जुलाई को अमेरिका के ह्यूस्‍टन में अपने वाणिज्‍य दूतावास के बंद किए जाने से भड़के चीन ने अमेरिका के सिचुआन प्रांत के चेंगदू में स्थित वाण‍िज्‍य दूतावास को बंद करने का फरमान जारी किया था। बता दें कि चेंगदू में स्थित अमेरिकी वाण‍िज्‍य दूतावास चीन में कई प्रांतों का कामकाज देखता है। इसी केंद्र के पास तिब्‍बत स्‍वायत्‍तशासी इलाके की भी जिम्‍मेदारी है। माना जा रहा है कि तिब्‍बत को लेकर अमेरिकी कदम को देखते हुए चीन ने यह कदम उठाया है। चीन ने वाशिंगटन और बीजिंग रिश्‍तों में आए तनाव के लिए वॉशिंगटन को जिम्‍मेदार ठहराया था। उसने मांग की थी कि अमेरिका तत्‍काल ह्यूस्‍टन में चीनी वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने के आदेश को वापस ले।

72 घंटों के भीतर चीनी वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश

22 जुलाई को अमेरिकी विदेश विभाग ने 72 घंटों के भीतर वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था। विदेश विभाग ने आरोप लगाया था कि चीनी एजेंटों ने टेक्सास में संस्थानों से डेटा चुराने की कोशिश की। विदेश विभाग की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने कहा था कि दूतावास बंद करने का उद्देश्य अमेरिका की बौद्धिक संपदा और अमेरिकियों की निजी सूचना की सुरक्षा करना है। इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा था कि चीन का ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास जासूसी का गढ़ बन गया था। पोम्पिओ ने कहा था कि हमने चीन के ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है, क्योंकि यह जासूसी और बौद्धिक संपदा को चुराने का अड्डा बन गया था। उन्होंने कहा कि चीन ने हमारी बौद्धिक संपदा चुराई और ट्रेड सीक्रेट चुराए जिसकी वजह से लाखों अमेरिकी नागरिकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।

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