ट्रंप ने जिसे जिहादी बोला क्या वो अमेरिका का पहला मुस्लिम सीनेटर बन सकता है?
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले मिशिगन सीनेट की दौड़ में डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद को 'जिहादी' बताया।

डोनल्ड ट्रंप और अब्दुल अल सैयद। (फाइल फोटो।)
HighLights
ट्रंप ने मिशिगन उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद को 'जिहादी' कहा।
अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने की दौड़ में।
मिशिगन सीनेट सीट के लिए मुकाबला बेहद कड़ा है।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) में अब बस एक हफ्ते से कुछ ही समय बचा है। ऐसे में मिशिगन में सीनेट की दौड़ ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद पर तीखे हमले किए। उन्होंने अल-सैयद को जिहादी करार दिया और उन पर चरमपंथी समूहों से जुड़े होने का आरोप लगाया।
अल-सैयद 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने की कोशिश कर रहे हैं। पोर्ट ह्यूरॉन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने अल-सैयद को जिहादी और आतंकवादियों का समर्थक बताया। उन्होंने दावा किया कि सीनेट में जाने से पहले उन्हें मेटल डिटेक्टर से गुजरना होगा।
आतंकवादी हमलों का जिक्र
ट्रंप ने 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने अल-सैयद को सीनेट में जाने से रोकने की कोशिशों की तुलना यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 के उन यात्रियों से की, जिन्होंने विमान अपहरणकर्ताओं का मुकाबला किया था।
राष्ट्रपति ने अल-सैयद पर मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े होने और शरिया कानून लागू करने की इच्छा रखने का आरोप लगाया। हालांकि, अल-सैयद के इस संगठन से जुड़े होने का कोई सबूत पेश नहीं किया गया है और उन्होंने इन आरोपों से बार-बार इनकार किया है।
कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?
- मिस्र से आकर अमेरिका में बसे माता-पिता के घर जन्मे अल-सैयद एक डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ हैं। वह पहले डेट्रायट के स्वास्थ्य निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं।
- उन्होंने 2018 में मिशिगन के डेमोक्रेटिक गवर्नर पद के प्राइमरी चुनाव में हिस्सा लिया था, लेकिन वे जीत नहीं पाए।
- इसके बाद, अगस्त 2026 में उन्हें पार्टी की ओर से सीनेट का नामांकन मिला।
- उनके चुनाव प्रचार का मुख्य फोकस स्वास्थ्य सेवा, किफायती आवास और आर्थिक असमानता पर है।
- उन्होंने इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता की भी आलोचना की है।
अल-सैयद ने क्या कहा है?
रविवार को ग्रैंड रैपिड्स में एक रैली के दौरान अल-सैयद ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे मतदाताओं का ध्यान आर्थिक मुद्दों से भटकाने के लिए उनके नाम और धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "उन्हें लगता है कि मेरे नाम और मेरे धर्म की ओर इशारा करके वे लोगों का ध्यान इस बात से हटा देंगे कि वे गैस या किराने का सामान खरीदने में असमर्थ हैं या डॉक्टर के पास नहीं जा पा रहे हैं।"
एल-सैयद ने ट्रंप द्वारा उनके मिडल नेम को बार-बार इस्तेमाल किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि उन्हें मेरा पूरा नाम याद है या नहीं क्योंकि नवंबर के बाद वे मुझे सीनेटर कहकर बुला सकते हैं। भाई, तब मैं आपके लिए सीनेटर मुहम्मद होऊंगा।"
उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स ने भी अमेरिका के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाया है। एक बहस के दौरान रोजर्स ने पूछा, "क्या आप अमेरिका के पक्ष में हैं या फिर विदेशों में मौजूद इन आतंकवादी समूहों के पक्ष में?" अल-सैयद ने इस सवाल को शर्मनाक बताया और कहा, "मुझे अपने संविधान पर गर्व है, जो हम सभी को अपनी मर्जी से प्रार्थना करने का अधिकार देता है।"
ट्रंप की टिप्पणियों की आलोचना अरब अमेरिकन्स फॉर ट्रंप के संस्थापक बिशारा बहबाह ने भी की है। यह एक ऐसा समूह है जिसने 2024 में अरब अमेरिकी मतदाताओं तक पहुंचने की राष्ट्रपति की कोशिशों का समर्थन किया था। बहबाह ने कहा, "राष्ट्रपति के बयान मर्यादा से बाहर हैं। वे एक रेड लाइन पार कर रहे हैं। ये नस्लवादी हैं।"
क्या अल-सैयद मिशिगन सीनेट की दौड़ जीत सकते हैं?
3 नवंबर को होने वाले चुनाव में अल-सैयद का मुकाबला रिपब्लिकन माइक रोजर्स से है, जो पूर्व कांग्रेस सदस्य (कांग्रेसमैन) रह चुके हैं। यह सीट डेमोक्रेटिक सीनेटर गैरी पीटर्स के हटने से खाली हो रही है। यह मुकाबला काफी कड़ा है।
24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच हुए सर्वेक्षणों के रियलक्लियरपोलिंग औसत के अनुसार, अल-सैयद 47.9% के साथ रोजर्स (46%) से आगे थे, जो 1.9 प्रतिशत अंकों का अंतर है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शनिवार को मिशिगन में अल-सैयद के लिए प्रचार किया, जबकि सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
अमेरिकी सीनेट पर नियंत्रण की लड़ाई में मिशिगन एक महत्वपूर्ण राज्य है। रिपब्लिकन पार्टी ने इस राज्य में तीन दशकों से अधिक समय से कोई सीनेट चुनाव नहीं जीता है। इस राज्य में अरब-अमेरिकी आबादी भी काफी बड़ी है, खासकर डियरबॉर्न में। गाजा युद्ध को लेकर बाइडेन प्रशासन के रवैये से असंतोष के बीच ट्रंप ने 2024 में यहां जीत हासिल की थी।
अगर अल-सैयद 3 नवंबर को जीत जाते हैं तो वे अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन जाएंगे।
