क्या AI सच में इंसानों को मार सकता है? एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन के दावों पर CEO ने क्या कहा
AI की अंधी जैसी रफ्तार और इसके संभावित खतरों पर छिड़ी बहस मानवता के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

एन्थ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई।
HighLights
क्या सच में इंसानों की जान के लिए खतरा है AI?
एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन के दावों से शुरू हुई थी बहस।
अब एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने बताई पूरी सच्चाई।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जितनी तेजी से हमारी दुनिया का हिस्सा बन रही है, उतनी ही तेजी से इसके भविष्य को लेकर दुनिया भर में गंभीर चिंताएं भी गहराने लगी हैं। अब चिंता की शुरुआत तब हुई जब हाल ही में एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने सीएनएन के जाने-माने एंकर एंडरसन कूपर को दिए एक इंटरव्यू में AI की इस तेज रफ्तार और इसके संभावित खतरों पर खुलकर बात की है।
अच्छा, यह बात करने की जरूरत क्यों पड़ी? तो बता दें कि यह पूरी बहस तब शुरू हुई जब एंथ्रोपिक और OpenAI जैसी दिग्गज कंपनियों में काम कर चुके एआई शोधकर्ता जैकोब कॉक्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, फिर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बड़ा दावा किया, जिसे डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा और इस पर बहस छिड़ गई।
ऐसा क्या दावा कर दिया जैकोब कॉक्सन ने?
बीते दिनों जैकब कॉक्सन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था कि AI बनाने वाले लोग खुद इस बात पर गंभीरता से विश्वास करते हैं कि यह तकनीक इस दशक के अंत तक हम सबको यानी पूरी मानवता को खत्म कर सकती है। यह कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है।
कॉक्सन ने कहा कि कई बड़े अधिकारी और सीनियर रिसर्चर्स प्रेस के सामने खुद को समझदार दिखाने के लिए अपनी बात को घुमा-फिराकर कहते हैं, लेकिन बंद कमरों में मैं उन्हीं लोगों को डर व्यक्त करते हुए सुनता हूं। मानवीय इतिहास में किसी भी दूसरी गतिविधि से इतना बड़ा खतरा पैदा नहीं हुआ है।
अब सवाल उठा, क्या AI सचमुच इंसानों को मार सकता है?
कॉक्सन के पोस्ट ने दुनियाभर में चर्चा तो तेज कर दी। दूसरी तरफ जब सीएनएन के इंटरव्यू में डारियो अमोदेई से यह सवाल पूछा गया कि क्या एआई इंसानों की जान ले सकता है और इसकी कितनी संभावना है, तो उन्होंने जैकोब कॉक्सन की चिंताओं से काफी हद तक सहमति जता दी।
अमोदेई ने कहा कि वह जैकोब के विचारों से असहमत होने के मुकाबले उनसे ज्यादा सहमत हैं। उन्होंने कहा कि जैकोब के जाने का अंदाज बहुत दिलचस्प था क्योंकि उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है कि एंथ्रोपिक सबसे जिम्मेदार खिलाड़ी है और इन मुद्दों के प्रति सबसे ज्यादा जागरूक है।' यानी वे सीधे तौर पर हमारी कंपनी पर अंगुली नहीं उठा रहे थे, बल्कि वे पूरी इंडस्ट्री की उस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे जो बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।
संभावनाओं का खेल नहीं, इंसानी फैसलों का सवाल
अब इस बात में तो कोई दोहराई नहीं है कि अक्सर एआई के खतरों को प्रतिशत या प्रायिकता के अंकों में तौला जाता है, जैसे कि इसके गलत होने के 10% या 20% चांस हैं। लेकिन अमोदेई का मानना है कि सिर्फ आंकड़े गिनाने के बजाय हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आज इंडस्ट्री और समाज के लोग क्या फैसले ले रहे हैं?
गलत रास्तों पर परिणाम ज्यादा खतरनाक
अमोदेई ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हम सही रास्ते पर चलते हैं, तो चीजें गलत होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। लेकिन अगर हम गलत रास्ता चुनते हैं, तो इसके खतरनाक परिणाम और भी ज्यादा हो सकते हैं। इसलिए, हमें सिर्फ पासा फेंकने की बात करने के बजाय अपनी एजेंसी और सही रास्ते को चुनने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
अब सही रास्ता क्या और दुविधा क्या?
इस सवाल के जवाब में डारियो अमोदेई का मानना है कि सही रास्ते पर चलने के लिए पूरी एआई इंडस्ट्री और दुनिया भर की सरकारों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि, यह काम आसान नहीं है, लेकिन इसके बिना काम नहीं चलेगा।
इसके साथ ही, उन्होंने एक और बड़ा पहलू सामने रखा। उनका कहना है कि अगर हम तकनीक के विकास की रफ्तार को बहुत ज्यादा धीमा कर देते हैं, तो इसका डर यह है कि गलत लोग इस तकनीक की कमान अपने हाथ में ले लेंगे और अगर ऐसा हुआ, तो चीजें गलत होने और तबाही आने का जोखिम कई गुना बढ़ जाएगा।
AI एक दोधारी तलवार, समझिए कैसे?
गौरतलब है कि डारियो अमोदेई और जैकोब कॉक्सन जैसे दिग्गजों के इन बयानों से यह साफ हो जाता है कि एआई सिर्फ एक चमत्कारी तकनीक नहीं है, बल्कि यह दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ यह इंसानी विकास को आसमान पर पहुंचा सकती है, तो दूसरी तरफ इसकी बेलगाम रफ्तार मानवता के लिए अस्तित्व का संकट भी पैदा कर सकती है।
ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियां मुनाफों की अंधी दौड़ को छोड़कर सुरक्षा और नियमों को प्राथमिकता देंगी या फिर इंसानों को एक दिन अपनी ही बनाई इस मशीन के आगे बेबस होना पड़ेगा?
