न्यूयार्क, एजेंसी। भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी (75) पर शुक्रवार को न्यूयार्क में चाकू से जानलेवा हमला हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने गए रुश्दी को हमलावर ने कई मुक्के मारे, इसके बाद चाकू से कई वार किए। चाकू प्रहार से उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया और रक्तस्त्राव से शरीर का ऊपरी हिस्सा भीग गया। हमले से घायल होकर रुश्दी मंच पर ही गिर गए। कुछ ही क्षणों में पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर से बचाकर उन्हें हेलीकाप्टर से अस्पताल भेजा। 

  • द सैटेनिक वर्सेस के अंशों के कारण कट्टरपंथी थे नाराज
  • ईरानी नेता अयातुल्ला खोमैनी ने जारी किया था फतवा
  • गर्दन पर हुए प्रहारों से बड़ी मात्रा में रक्तस्त्राव
  • काले लिबास में आया हमलावर हुआ गिरफ्तार

हमलावर से हो रही पूछताछ

समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है। रुश्दी 1988 में लिखी अपने उपन्यास द सैटेनिक वर्सेस में की गई इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के लिए विवाद में आए थे। एक साल बाद 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खोमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी किया था। इसके बाद से उनकी जान पर खतरा बना हुआ था।

काला फेस मास्क लगाए था हमलावर

न्यूयार्क के गवर्नर कैथी होचल ने कहा है कि रुश्दी के उचित इलाज के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी सर्जरी की जा रही है। पुलिस ने काले लिबास और काला फेस मास्क लगाए हमलावर की पहचान और उसके उद्देश्य के बारे में अभी कुछ नहीं बताया है। 

चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन के कार्यक्रम में हुए थे शरीक

शुक्रवार को वह पश्चिमी न्यूयार्क के चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गए थे, वहीं उन पर व्याख्यान देने से पहले हमला हुआ। रुश्दी वहां मौजूद करीब ढाई हजार लोगों को लेखकों-कलाकारों की वैचारिक स्वतंत्रता और अमेरिका में उन्हें शरण देने पर व्याख्यान देने वाले थे।

2016 में मिली अमेरिकी नागरिकता

मुंबई में मुस्लिम परिवार में जन्मे रुश्दी कई दशक तक ब्रिटेन में रहे हैं। 2007 में रुश्दी को साहित्य की सेवा के लिए ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने नाइट की उपाधि से सम्मानित किया, जिसके बाद उन्हें सर का खिताब हासिल हुआ। रुश्दी सन 2000 के बाद अमेरिका चले गए। 2016 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल गई थी और इस समय वह न्यूयार्क सिटी में रह रहे थे।

कई देशों में प्रतिबंधित है द सैटेनिक वर्सेस

द सैटेनिक वर्सेस प्रकाशित होने के बाद मिली धमकियों को देखते हुए ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें सुरक्षा दी थी। उपन्यास में की गई टिप्पणियों को कई मुस्लिम देशों ने इस्लाम विरोधी माना था और उस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। कई देशों में यह उपन्यास प्रतिबंधित है। ईरान की तत्कालीन कट्टरपंथी सरकार ने रुश्दी की हत्या के लिए 30 लाख डालर के पुरस्कार की घोषणा भी की थी।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा, प्रभावी है फतवा

ईरान सरकार की ओर से फतवा जारी होने के बाद रुश्दी ने कई साल तक गुमनामी का जीवन जिया। 1998 में ईरान की सरकार ने फतवा के प्रभावी न होने की बात कही। लेकिन 2017 में ईरान में खुमैनी के उत्तराधिकारी अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा, फतवा अभी भी प्रभावी है।

मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिए मिला बुकर अवार्ड

रुश्दी को मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के लिए 1981 में प्रतिष्ठित बुकर अवार्ड मिला था। उनका नया उपन्यास विक्ट्री सिटी फरवरी 2023 में प्रकाशित होने वाला है। रुश्दी धार्मिक कट्टरता के विरोधी हैं और भारत में बढ़ रही धार्मिक हिंसा के प्रति भी आलोचनात्मक विचार रखते हैं। भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने रुश्दी पर हमले को स्तब्धकारी बताया है और उसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। तस्लीमा अपने लिखे उपन्यास लज्जा के कुछ अंशों के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

Edited By: Krishna Bihari Singh