संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र। कामगारों की फौज में शामिल होने वालों को अच्छी नौकरी देने के लिए भारत को 8-10 फीसद की सालाना दर से विकास करना होगा। यह बात प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कही। भारत की नई सरकार के लिए आर्थिक प्राथमिकता विषय पर आयोजित एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि ऊंचे वेतन वाला रोजगार पैदा करने के लिए भारत को निश्चित रूप से निर्यात आधारित विकास पर वापस आना चाहिए। पैनल चर्चा का आयोजन न्यूयॉर्क में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास, दीपक एंड नीरा राज सेंटर फॉर इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआइएसपीएफ) ने मिलकर किया था।

पनगढ़िया जनवरी 2015 से लेकर अगस्त 2017 तक नीति आयोग के पहले वाइस चेयरमैन रहे थे। फिलहाल वह कोलंबिया विश्वविद्यालय में राज सेंटर फॉर इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज के निदेशक हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को खोलना होगा। कई उत्पादों पर शुल्क में हो रही बढ़ोतरी के बीच उन्होंने कहा कि आयात किए जाने वाले उत्पादों का देश में ही उत्पादन करने (इंपोर्ट सब्सटीट्यूशन) का समूचा विचार भारत को पीछे की ओर ले जाने वाला है। भारत को इतनी तेज रफ्तार से जो विकास हो रहा है, वह इसलिए हो रहा है कि वर्ष 2000 के बाद से व्यापार का उदारीकरण किया गया और निर्यात का अत्यधिक तेजी से विस्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि 2003-04 के बाद से 15 साल तक भारत की विकास दर करीब सात फीसद रही है। लेकिन यदि अच्छी नौकरियां प्रदान करनी हैं, तो हमें 8-10 फीसद की दर से विकास करना होगा। अच्छी नौकरी के लिए निर्यात आधारित विकास भी बहुत जरूरी है।

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Posted By: Tanisk

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