वाशिंगटन, प्रेट्र। वैज्ञानिकों ने ऐसे हाइब्रिड सूक्ष्मजीवों को विकसित किया है जो वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन का उपयोग करके विविध प्रकार के प्लास्टिक और ईंधन बनाएंगे। इस प्रक्रिया से वातावरण में मौजूद हानिकारक गैसों को कम करने में मदद तो मिलेगी ही साथ ही इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना नए रसायन का निर्माण किया जा सकेगा।

शोधकर्ताओं ने बताया कि सूक्ष्मजीव की कोशिकाओं में प्रकाश से सक्रिय होने वाले क्वांटम डॉट्स को लगाकर ऐसा किया जा सकता है। शोधकर्ता इस प्रकार की एक सजीव फैक्टरी लगाने में सक्षम हैं जहां खतरनाक कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी उत्पादों जैसे की मिट्टी में जल्दी मिल जाने वाली प्लास्टिक, गैसोलीन, अमोनिया बॉयोडीजल आदि में बदला जा सकेगा।

अमेरिका में कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी के असिसटेंट प्रोफेसर प्रशांत नागपाल ने बताया कि यह प्रयोग दिखाता है कि जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में कितनी शक्ति है। उन्होंने कहा कि हम काफी समय से ऐसी तकनीक ढूंढ़ रहे थे जो जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड को कम कर सके और उससे कुछ उपयोगी पदार्थ बनाए जा सकें।

इस तरह बनाया जाएगा ईंधन 

इस प्रोजेक्ट पर काम 2013 में तब शुरू किया गया जब वैज्ञानिकों ने नैनोस्कोपिक क्वांटम डॉट्स की व्यापक क्षमता की खोज शुरू की। क्वांटम डॉट्स टेलीविजन सेटों में इस्तेमाल होने वाले छोटे अर्धचालकों (सेमीकंडक्टर) के समान होते हैं। वैज्ञानिकों ने इनको सूक्ष्मजीवों के कोशिकाओं के अंदर फिट किया। इसके बाद प्रकाश की विभिन्न तरंगदैघ्र्य किरणों का उपयोग कर उन्हें सक्रिय किया जाता है। जिससे वह एंजाइम से मिलकर आगे की क्रिया करते हैं। यह एक प्रकार से प्रकाश संश्लेषण जैसी विधि ही होती है। प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर पौधे भोजन बनाते हैं। जबकि, इस प्रक्रिया में विकसित किए गए नए सूक्ष्मजीव कम प्रकाश की उपस्थिति में भी कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर नए उत्पाद बनाते हैं। ये सूक्ष्मजीव पानी में पड़े रहते हैं और नाइट्रोजन व कार्बन डाइऑक्साइड को परिवर्तित कर नया उत्पाद सतह पर छोड़ देते हैं।

बनाए जा सकते हैं अलग-अलग उत्पाद 

वैज्ञानिकों ने बताया कि क्वांटम डॉट्स और लाइट के अलग-अलग प्रकार के संयोजन से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जा सकते हैं। हरे रंग के प्रकाश के तरंगदैघ्र्य से बैक्टीरिया नाइट्रोजन का सेवन कर अमोनिया बनाता है तो वहीं, लाल रंग के तरंगदैघ्र्य से बैक्टीरिया कार्बन डाइऑक्साइड से प्लास्टिक बनाते हैं।

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Posted By: Ayushi Tyagi