क्या मिलेगा अमेलिया इयरहार्ट का 89 साल पहले लापता हुआ विमान? प्रशांत महासागर की ओर रवाना हुई US समुद्री आर्कियोलॉजिस्ट की टीम
अमेरिकी समुद्री आर्कियोलॉजिस्ट की एक टीम प्रशांत महासागर के निकुमारोरो द्वीप पर 1937 में लापता हुई प्रसिद्ध पायलट अमेलिया इयरहार्ट के विमान की तलाश में रवाना हुई है।

पायलट अमेलिया इयरहार्ट के विमान की तलाश में रवाना हुई US समुद्री आर्कियोलॉजिस्ट की टीम(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। 20वीं सदी के सबसे बड़े अनसुलझे रहस्यों में से एक को सुलझाने के लिए अमेरिकी समुद्री आर्कियोलॉजिस्ट का एक टीम प्रशांत महासागर के एक सुदूर द्वीप की ओर रवाना हुआ है। प्रसिद्ध अमेरिकी महिला पायलट अमेलिया इयरहार्ट 1937 में अपनी वैश्विक उड़ान के दौरान रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थीं।
पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के सहयोग से शुरू हुए इस नए अभियान का उद्देश्य निकुमारोरो द्वीप के लैगून में पानी के भीतर मौजूद एक संदिग्ध वस्तु की जांच करना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह वस्तु इयरहार्ट के दो इंजन वाले विमान 'लॉकहीड इलेक्ट्रा 10-ई' का मलबा हो सकती है।
निकुमारोरो द्वीप पर खोज दल की रवानगी
यह 17 सदस्यीय दल लॉस एंजिल्स से रवाना हुआ है और स्थानीय समयानुसार मंगलवार, 13 अक्टूबर को किरिबाती गणराज्य के निर्जन निकुमारोरो द्वीप पहुंचेगा। लगभग 9 लाख डॉलर की लागत वाले इस मिशन के तहत टीम द्वीप पर पांच दिन बिताकर सघन जांच करेगी।
अभियान का नेतृत्व कर रहे आर्कियोलॉजिकल लेगेसी इंस्टीट्यूट के रिचर्ड पेटिग्रेव का कहना है कि यदि यह विमान मिल जाता है, तो यह उनके जीवन की सबसे ऐतिहासिक खोज साबित होगी।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
इस मिशन को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। पिछले तीन दशकों से इस क्षेत्र का अध्ययन कर रहे रिसर्चर रिक गिलेस्पी का मानना है कि वहां विमान का कोई अवशेष नहीं मिलेगा।
पर्ड्यू की टीम का दावा है कि 2020 की सैटेलाइट तस्वीरों में पानी के नीचे दिखने वाली आकृति एक विमान के ढांचे और पंखों से मेल खाती है, जो 1938 की ऐतिहासिक तस्वीरों में भी देखी जा सकती है।
इसके विपरीत, गिलेस्पी का तर्क है कि वह आकृति पानी में बहकर आई पैंडेनस के पेड़ की है, जिसकी जड़ें और शाखाएं साफ पहचानी जा सकती हैं। उनका मानना है कि वास्तविक विमान दशकों पहले समुद्र की लहरों में बहकर नष्ट हो चुका है।
1937 में कैसे लापता हुई थीं इयरहार्ट
2 जुलाई, 1937 को 39 वर्षीय अमेलिया इयरहार्ट ने अपने नेविगेटर फ्रेड नूनन के साथ पापुआ न्यू गिनी से उड़ान भरी थी। वे दुनिया का चक्कर लगाने वाली पहली महिला पायलट बनने के बेहद करीब थीं।
उड़ान के दौरान उनका विमान ईंधन की कमी से जूझने लगा और उनका अंतिम रेडियो संदेश मिला कि विमान में गैस खत्म हो रही है।
इसके तुरंत बाद उनसे संपर्क टूट गया। हालांकि अमेरिकी सरकार का आधिकारिक मानना रहा है कि विमान समुद्र में गिर गया था, लेकिन कई शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दोनों ने निकुमारोरो द्वीप पर आपातकालीन लैंडिंग की थी और वहीं उनकी मृत्यु हो गई।
क्या है अभियान का उद्देश्य?
पर्ड्यू यूनिवर्सिटी का इयरहार्ट से गहरा नाता रहा है, क्योंकि इयरहार्ट वहां सलाहकार थीं और विश्वविद्यालय के फंड से ही उनके इस विमान का निर्माण हुआ था।
दल के कानूनी सलाहकार स्टीव शुल्त्स ने स्पष्ट किया है कि यदि इस यात्रा में विमान का मलबा मिल भी जाता है, तो इस बार वहां से कोई भी अवशेष नहीं हटाया जाएगा। मलबे को बाहर निकालने या किसी भी कलाकृति को लाने के लिए किरिबाती सरकार से आगे की आधिकारिक अनुमति लेना आवश्यक होगा।
