एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट… ईरान पर अमेरिकी हमले की तैयारी शुरू? इजरायल अलर्ट
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति संगठन लॉन्च करने के बाद ...और पढ़ें
HighLights
अमेरिका ने खाड़ी में युद्धपोत, फाइटर जेट तैनात किए।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर अमेरिकी सैन्य संकेत।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, इजरायल अलर्ट।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम से एक अंतरराष्ट्रीय संगठन लॉन्च किया, जिसका मकसद दुनिया में शांति और स्थिरता लाना बताया गया है।
लेकिन, इसके ठीक 24 घंटे के भीतर ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत, फाइटर जेट और मिसाइल सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं जिससे हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं।
अमेरिका ने तैनात किए F-15E फाइटर जेट
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जल्द ही अरब सागर या फारस की खाड़ी में पहुंच सकता है। इस ग्रुप में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और एक अटैक सबमरीन भी शामिल है। यह बेड़ा पहले दक्षिण चीन सागर में था, लेकिन ट्रंप के आदेश के बाद इसे पश्चिम की ओर मोड़ा गया।
A U.S. Air Force F-15E Strike Eagle assigned to the 494th Expeditionary Fighter Squadron lands at a base in the Middle East, Jan. 18. The F-15's presence enhances combat readiness and promotes regional security and stability. pic.twitter.com/QTXgOsOozV
— U.S. Central Command (@CENTCOM) January 20, 2026
फिलहाल यह स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर क्षेत्र में माना जा रहा है, लेकिन अब यह 'डार्क' हो गया है, यानी ट्रैकिंग से बचने के लिए इसके ट्रांसपोंडर बंद कर दिए गए हैं। इस बीच, F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट पश्चिम एशिया में तैनात किए जा चुके हैं। ये वही स्क्वाड्रन है, जिसे अप्रैल 2024 में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद इजरायल की सुरक्षा के लिए भेजा गया था।
लंबी दूरी के हमले की तैयारी
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, KC-135 एयर रिफ्यूलिंग टैंकर भी इलाके में भेजे गए हैं, जिससे फाइटर जेट हवा में ही ईंधन भर सकें और लंबी दूरी तक हमला कर सकें। इसके अलावा, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में THAAD और पैट्रिएट जैसी एंटी-मिसाइल प्रणालियां भी तैनात की हैं।
खासतौर पर इजरायल और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों में सुरक्षा मजबूत की गई है। यह पूरा सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।
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अमेरिका का कहना है कि ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान सरकार ने हिंसक कार्रवाई की है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अब तक 3117 लोगों की मौत हुई है, जिनमें आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, संभव है कि 20 हजार से अधिक लोग मारे गए हों।
ट्रंपने कई बार ईरान को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान को सैकड़ों लोगों को फांसी देने की योजना रोकनी पड़ी।
अमेरिका को ईरान की चेतावनी
ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरान ने फिर से परमाणु कार्यक्रम शुरू किया तो उसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन बाद में उन्होंने अपने बयान कुछ हद तक नरम भी किए। विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप की रणनीति दबाव बनाकर बातचीत के लिए मजबूर करने की रही है।
ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। उसने चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेकेश्कियान ने अमेरिका और इजराय पर आरोप लगाया कि वे जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद बदले की भावना से प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।
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एक और बड़ी चिंता की बात है कि जून 2025 में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का करीब 400 किलो समृद्ध यूरेनियम कहां गया, इसक अब तक पता नहीं चल पाया है। यह मात्रा करीब 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए कफी मानी जाती है।
अगर हमला हुआ तो कैसा होगा?
सैन्य जानकारों के मुताबिक, अमेरिका आमतौर पर चरणबद्ध कार्रवाई करता है। पहले सीमित चेतावनी हमले, फिर दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाना। इसके बाद परमाणु ठिकानों पर हमला भी एक विकल्प हो सकता है, जैसा जून 2025 में हुआ था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसका भू-आर्थिक असर है। 2024 में रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरा जिस पर ईरान का प्रभाव है। अगर ईरान ने इस रास्ते को अस्थिर किया भले ही पूरी तरह बंद न भी किया तो तेल की कीमतें, बीमा और शिपिंग लागत तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे अमेरिका पर राजनीतिक दबाव बन सकता है।
इजरायल की भूमिका
अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इजरायल भी इस संघर्ष में खिंच सकता है। ईरान उसे दूसरा लक्ष्य मान सकता है। इजरायल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली आयरन डोम और एरो सिस्टम क्षेत्र में नुकसान को सीमित करने में अहम मानी जाती है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इससे अमेरिका को समय मिल सकता है और ईरान को भी चेहरा बचाने का रास्ता।
