न्यूयॉर्क, एएफपी। व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के 17 साल बाद भी करीब 1,100 पीडि़तों की पहचान नहीं हो पाई है। इतने साल बीतने पर भी न्यूयॉर्क स्थित लैब के विशेषज्ञ उसी धैर्य के साथ पीडि़तों के अवशेषों की जांच में जुटे हैं। प्रतिदिन वह अवशेषों से डीएनए मैच कराने के लिए एक ही प्रक्रिया दोहराते हैं लेकिन उनकी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।

आतंकी संगठन अलकायदा ने 11 सितंबर, 2001 को चार विमान हाईजैक कर अमेरिका पर बड़ा हमला बोला था। दो विमानों से यहां व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी और दक्षिणी टावर को ध्वस्त कर दिया गया था। इस हमले में 2753 लोगों की जान गई थी और छह हजार के करीब घायल हुए थे। मृतकों में 1642 की पहचान हो चुकी है। 1111 अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच चल रही है।

फोरेंसिक बायोलॉजी विभाग के सहायक निदेशक मार्क डिजायर ने कहा, 'हड्डियों की जांच करना सबसे मुश्किल होता है। आग, बैक्टीरिया, सूर्य की रोशनी, डीजल और जेट ईंधन आदि के संपर्क में आने से डीएनए नष्ट हो जाते हैं। हमारे पास मानवीय अवशेषों के जो 22 हजार टुकड़े हैं उनमें बहुत कम मात्रा में डीएनए हैं। इन सबकी 10-15 बार जांच हो चुकी है।'

कई बार तो पूरा साल किसी पीडि़त की पहचान के बिना ही बीत जाता है। इसके बावजूद सब बिना हार माने अपना काम कर रहे हैं। गत जुलाई में करीब एक साल बाद एक पीडि़त की पहचान की पुष्टि हुई।

पहचान होने पर परिजनों को मिलती है तसल्ली

पीडि़त की पहचान होने पर उनके परिजनों को सूचित किया जाता है। हमले में अपने 24 वर्षीय बेटे को खोने वाली मैरी फेटसेट ने कहा, 'सूचना मिलने पर आप फिर उसी भयावह दिन की याद में चले जाते हैं, लेकिन यह आपको तसल्ली भी देता है। आप अपनों को उचित सम्मान के साथ विदाई दे पाते हैं।'

कई विशेषज्ञ हमले के वक्त स्कूल में कर रहे थे पढ़ाई

न्यूयॉर्क स्थित लैब में काम कर रहे कई विशेषज्ञ हमले के वक्त प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहे थे। डिजायर ने कहा, 'हमले के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं होने पर भी वे समझते हैं कि यह कितना महत्वपूर्ण है। सभी बड़ी संवेदनशीलता से अपना काम कर रहे हैं।' दक्षिण अफ्रीका से लेकर अर्जेटीना तक की टीमें न्यूयॉर्क में इन विशेषज्ञों से सीखने आती हैं।

 

Posted By: Bhupendra Singh