वाशिंगटन, प्रेट्र। कोरोना वायरस (Covid-19) से मुकाबले के लिए विज्ञानियों ने एक नया रैपिड ब्लड टेस्ट विकसित किया है। इससे कोरोना की गंभीरता के खतरे को भांपा जा सकता है। अस्पताल में भर्ती होने के पहले दिन ही इस जांच के जरिये यह पता लगाया जा सकेगा कि किस रोगी में कोरोना के गंभीर संक्रमण या मौत का उच्च खतरा है। इस तरीके से पहचान कर उच्च जोखिम वाले मरीजों को विशेष इलाज मुहैया कराकर उनके जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।

नई जांच में माइटोकांड्रियल डीएनए के स्तरों को आंका जाता है

जेसीआइ इनसाइट पत्रिका में इस नए टेस्ट की व्याख्या की गई है। इसमें यह बताया गया है कि नई जांच में माइटोकांड्रियल डीएनए के स्तरों को आंका जाता है। माइटोकांड्रियल डीएनए एक खास प्रकार का जेनेटिक मैटिरियल है, जो कोशिकाओं के अंदर पाया जाता है।

शरीर में एक विशेष प्रकार की कोशिका हो रही खत्म

अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार, माइटोकांड्रियल डीएनए कोशिकाओं से निकलकर रक्त में चला जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि शरीर में एक विशेष प्रकार की कोशिका खत्म हो रही है।

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता एंड्रयू ई गेलमैन ने कहा, 'कोरोना रोगियों की दशा को आंकने के लिए डॉक्टरों को बेहतर उपकरणों की जरूरत है। इससे रोगियों को जल्द से जल्द बेहतर उपचार मुहैया कराया जा सकता है।'

कोरोना बीमारी की गंभीरता के खतरे का अनुमान लगाने में मिल सकती है मदद 

शोधकर्ताओं का मानना है कि नए ब्लड टेस्ट से कोरोना बीमारी की गंभीरता के खतरे का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने के पहले दिन 97 मरीजों पर यह नया टेस्ट आजमाया और उनके माइटोकांड्रियल डीएनए का आकलन किया।

उन्होंने उन मरीजों में माइटोकांड्रियल डीएनए का उच्च स्तर पाया, जिनको आइसीयू में भर्ती किया गया था। इस टेस्ट के जरिये मरीजों में परिणाम का आकलन भी किया जा सकता है। 

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