वाशिंगटन [ जागरण स्‍पेशल ]। यदि नासा के इस वैज्ञानिक की बातों पर यकीन करें तो एलियंस हमारे नाक के नीचे से निकल गए और हम उनकी यात्रा से अंजान रहे। एलियंस की यह यात्रा अति गोपनीय थी। दरअसल, अति सुक्ष्‍म आकार होने के कारण वह मानव की नजरों से ओझल रहे। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बेहद बुद्धिमान हैं। उनकी यह भविष्‍यवाणी ऐसे समय में आई है, जब इंसान बरसों से एलियन की तलाश कर रहा है। मानव के लिए एलियंस अभी भी अबूझ पहेली है। इसके लिए वह कभी दूरबीन से उनकी तलाश करता है तो कभी अंतरिक्ष दूरबीन से या यान भेजकर उसे तलाशा जाता है।

बता दें कि नासा अमेरिका की स्‍पेश एजेंसी है। सिल्वानो पी कोलंबानो नासा के वैज्ञानिक हैं, इनका दावा है कि एलियंस धरती पर कदम रख चुके हैं। उनका दावा है कि एलियंस मानव की तुलना में कहीं ज्‍यादा बुद्धिमान हैं। उनके पास सुपर ब्रेन है। उनके पास ऐसी अद्भुत तकनीक है, जिसका मानव कल्‍पना नहीं कर सकता है। वह अंतरिक्ष यात्रा में बेहद सक्षम हैं।

नासा के इंटेलिजेंट सिस्टम डिवीजन में काम करने वाले सिल्वानो का मानना ​​है कि एलियंस का जीवन मानव के पारंपरिक कार्बन आधारित जीवन और मानवता के इतिहास से एकदम अलग है। उन्‍होंने कहा कि प्रचलित और परंपरागत तकनीक और धारणा से हम एलियंस की सभ्‍यता और संस्‍कृति को नहीं समझ सकते हैं। यानी मानव सभ्‍यता को समझने वाली तकनीक और धारणा से हम एलियंस को नहीं समझ सकते हैं।

डॉ सिल्वानो ने यह सुझाव दिया कि वैज्ञानिकों को अपनी खोज एवं विचारों को और विस्तार देने की जरूरत है। वैज्ञानिकों का इस बात की खोज करनी चाहिए कि आखिर धरती पर पहुंचने वाले अतिरिक्‍त सुक्ष्‍म स्‍थलीय जीव क्‍या पंसद करेंगे। उन्‍होंने अपने यह विचार कैलिफ़ोरिया में आयोजित नासा के 'बाहरी अंतरिक्ष की खोज' परियोजना के तहत 'डीकोडिंग एलियन इंटेलिजेंस' नामक एक वर्कशॉप में कही।

डॉ सिल्वानो का तर्क है कि वैज्ञानिकों को अन्‍य ग्रहों से मिलने वाले संकेतों पर ध्‍यान देना चाहिए। आधुनिक प्रौद्योगिकी को इस ओर ध्‍यान देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ऐसा हो सकता है कि धरती से बहुत पुराने ग्रह में रहने वाली सभ्‍यता से हम अंजान हो। उन्‍होंने कहा कि ऐसा हो सकता है कि हम उससे मिलने वाले सिंग्‍नल को पकड़ पाने में अक्षम हो। उन्‍होंने कहा हमारी यही असमर्थता ही एलियंस के अस्तित्‍व की ओर संकेत करती है।

तीन वर्ष पूर्व ब्रिटेन ने शुरू किया था अभियान

तीन वर्ष पूर्व ब्रिटेन के मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग ने इस अभियान की शुरुआत की थी कि अंतरिक्ष में पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन है या नहीं। ये अभियान प्रोफ़ेसर हॉकिंग ने अमरीका में रह रहे अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर शुरू किया था। दूसरे ग्रह पर जीवन की खोजने के लिए यह यह अब तक सबसे बड़ा अभियान था। दस वर्षों तक चलने वाले इस अभियान में पृथ्वी के क़रीब स्थित लाखों तारों से आने वाले सिग्नलों को सुना जाएगा। इस परियाजना में 10 करोड़ डॉलर यानी क़रीब छह अरब रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया था। इस अभियान का उद्घाटन लंदन के रॉयल सोसाइटी में किया गया।

इसके तहत पुराने अभियानों की तुलना में इस बार दस गुना ज़्यादा आकाश को कवर किया जाएगा। साथ ही पांच गुना अधिक रेडियो स्पेक्ट्रम को स्कैन किया जाएगा। इस अभियान में दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली दूरबीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें से एक वेस्ट वर्जीनिया का ग्रीन बैंक टेलीस्कोप है और दूसरा ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स का पार्क्स टेलीस्कोप का इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

 

Posted By: Ramesh Mishra