ईरान युद्ध में मारे गए 22 अमेरिकी सैनिक, पेंटागन बता रहा 18; रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
पेंटागन द्वारा सार्वजनिक रूप से बताई गई संख्या से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। अखबार के अनुसार, ईरान युद्ध ...और पढ़ें

ईरान युद्ध में मारे गए 22 अमेरिकी सैनिक, पेंटागन बता रहा 18; रिपोर्ट (फोटो- AI Generated)
HighLights
18 मृतकों में से 14 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत सूचीबद्ध किया गया
पेंटागन ने फरवरी से मध्य पूर्व में मारे गए दो अमेरिकी सैन्य कर्मियों को अलग से श्रद्धांजलि दी है
रॉयटर, वाशिंगटन। वाशिंगटन पोस्ट ने शुक्रवार को अमेरिकी रक्षा विभाग के छह अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या पेंटागन घटाकर बता रहा है।
पेंटागन द्वारा सार्वजनिक रूप से बताई गई संख्या से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। अखबार के अनुसार, ईरान युद्ध में करीब 22 सैनिकों की मौत हुई है, जो पेंटागन के सार्वजनिक डाटाबेस में मौजूद आंकड़ों से चार ज़्यादा है।
वर्तमान में डीसीएएस में प्रदर्शित 18 मृतकों में से 14 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जो ईरान युद्ध के लिए प्रशासन द्वारा दिया गया नाम है।
चार अन्य को एक अलग विदेशी अभियान श्रेणी के तहत सूचीबद्ध किया गया है जो जुलाई में हुए युद्धविराम के बाद फिर से शुरू हुई लड़ाई से संबंधित है।
ईरान युद्ध में हुई मौतों की सूची से चार मौतों को पुनः शुरू हुई लड़ाई के बाद अलग से विदेशी अभियान श्रेणी में डाल दिया गया था।
पेंटागन ने कहा कि यह अलग श्रेणी इसलिए बनाई गई क्योंकि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समाप्त हो चुका था।
दो मौतें इस जटिलता को दर्शाती हैं
पेंटागन ने फरवरी से मध्य पूर्व में मारे गए दो अमेरिकी सैन्य कर्मियों को अलग से श्रद्धांजलि दी है, जो उन मिशनों पर सेवारत थे जो आधिकारिक तौर पर ईरान युद्ध का हिस्सा नहीं थे।
सार्जेंट डेविन सीबेल की 31 मई को इराक के इरबिल में एक प्रशिक्षण दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान 'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' में तैनात थे। डीसीएएस में संबंधित 'इनहेरेंट रिजॉल्व' के आंकड़ों में उनका नाम नहीं है।
मेजर सोरफ्ली डेवियस की 6 मार्च को कुवैत में एक अज्ञात चिकित्सा आपात स्थिति के बाद मृत्यु हो गई। वे ऑपरेशन स्पार्टन शील्ड के तहत तैनात थे, जो क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सैन्य सहयोग से जुड़ा एक मिशन था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मृत्यु का संबंध ईरानी हमले से था या नहीं।
