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पिघल रहे हैं धरती के दोनों ध्रुव... ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका से 'गायब' हो गई 12 लाख करोड़ टन बर्फ

By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
Published: Thu, 17 Sep 2026 08:35 AM (IST)

धरती के दोनों ध्रुव तेजी से पिघल रहे हैं...'साइंटिफिक डेटा' की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट बताती है कि पिछले 47 ...और पढ़ें

तेजी से पिघल रही बर्फ (सोशल मीडिया)

तेजी से पिघल रही बर्फ (सोशल मीडिया)

HighLights

  1. 1979 से अब तक 12.5 ट्रिलियन टन ध्रुवीय बर्फ पिघली।

  2. गर्म समुद्री पानी बर्फ पिघलने का मुख्य कारण है।

  3. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। हाल ही में विज्ञान पत्रिका 'साइंटिफिक डेटा' में छपी एक बड़ी और चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में हमारी धरती तेजी से गर्म हो रही है, जिसका सबसे बुरा असर पोलर रीजन यानी उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट की बातों को ऐसे समझा जा सकता है कि साल 1979 से लेकर अब तक ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियरों से 12.5 ट्रिलियन टन यानी करीब 11.3 लाख करोड़ मीट्रिक टन बर्फ पिघल चुकी है। यह बर्फ इतनी ज्यादा है कि अगर इसे पूरे अमेरिका महाद्वीप पर फैला दिया जाए, तो वहां 5 फीट गहरी बर्फ की चादर बिछ जाएगी।

समुद्र का बढ़ा जलस्तर

गौर करने वाली बात यह है कि पिघली हुई यह बर्फ लगभग 3 क्वाड्रिलियन गैलन यानी 11.3 क्वाड्रिलियन लीटर पानी में बदल गई। इसकी वजह से साल 1979 से अब तक दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर करीब 1 इंच यानी 3.1 सेंटीमीटर बढ़ चुका है।

बर्फ पिघलने का असली कारण क्या?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि आम तौर पर लोगों को लगता है कि हवा गर्म होने से बर्फ पिघल रही है, लेकिन यह स्टडी इससे बिल्कुल अलग सच सामने लाती है।  रिपोर्ट बताती है कि इस पिघलाव का पांचवा और छठा हिस्सा ऊपर की गर्म हवा की वजह से नहीं, बल्कि समुद्र के गर्म पानी की वजह से हो रहा है।

इसका कारण है कि गर्म पानी नीचे और किनारों से बर्फ की परतों को लगातार काट रहा है, जिससे ग्लेशियर टूटकर तेजी से महासागरों में बह रहे हैं। इसके अलावा जारी रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ग्रीनलैंड का जकोबशवन ग्लेशियर अब एक दिन में 164 फीट यानी 50 मीटर तक पीछे खिसक रहा है।

अब समझिए समुद्र का 1 इंच बढ़ना क्यों खतरनाक है?

नार्थुम्ब्रिया यूनिवर्सिटी की आइस साइंटिस्ट और इस स्टडी की मुख्य लेखिका इनेस ओतोसाका के मुताबिक, सुनने में 1 इंच का यह आंकड़ा बहुत छोटा लग सकता है, लेकिन इसके परिणाम भयानक हैं। 

इस बात को ऐसे समझिए कि समुद्र का जलस्तर हर एक तिहाई इंच बढ़ने पर दुनिया भर में 20 से 30 लाख लोग ऐसे हैं जिनके घरों और इलाकों में हर साल कम से कम एक बार बाढ़ आने का खतरा पैदा हो जाता है और बड़ा कारण यह भी है कि जैसे-जैसे समुद्र का स्तर ऊपर उठेगा, दुनिया भर के तटीय इलाके और भी ज्यादा असुरक्षित हो जाएंगे।

1970 के दशक से अब तक क्या बदलाव आया?

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने इस बार नासा के पुराने सैटेलाइट्स की मदद ली और अंटार्कटिका के आंकड़े 1979 तक और ग्रीनलैंड के आंकड़े 1972 तक खंगाल डाले। इससे यह साफ पता चला कि 70, 80 और 90 के दशक में बर्फ की ये परतें काफी हद तक स्थिर थीं। इसके बाद 2010 के दशक में बर्फ पिघलने की रफ्तार तेजी से बढ़ी और इसने विकराल रूप ले लिया।

2020 से 2023 के बीच ठहराव की कहानी समझिए

दूसरी ओर सैटेलाइट्स तस्वीर में खुलासा हुआ है कि बीच में तीन साल यानी 2020-23 ऐसे आए जब बर्फ पिघलने की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ मौसम में बदलाव के कारण हुआ था।

इसके बाद साल 2023 के बाद आंकड़े देखने पर पता चला है कि बर्फ के तेजी से पिघलने का यह ट्रेंड फिर से शुरू हो चुका है। इसके अलावा गौर करने वाली बात यह भी है कि अंटार्कटिका में कुछ स्थिरता इसलिए बनी रही, क्योंकि पूर्वी अंटार्कटिका में रिकॉर्ड बर्फबारी हुई थी, जिसने पश्चिमी अंटार्कटिका में हो रहे तेजी से नुकसान की भरपाई कर दी थी।

वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता क्या?

गौरतलब है कि स्टडी से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक एरिक रिग्नोट का कहना है कि अब खतरा बिल्कुल साफ है। वहीं, न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के आइस साइंटिस्ट डेविड हॉलैंड ने चेतावनी दी है कि ज्यादातर बर्फ का नुकसान डायनेमिक यानी तेजी से होने वाली हलचल तरीकों से हो रहा है, जो किसी भी वक्त कोलैप्स सिनेरियो यानी विनाशकारी ढहने की स्थिति को जन्म दे सकता है।

दूसरी तरफ वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग का असर दशकों बाद इन ग्लेशियरों पर दिखता है। यानी आज अगर हम धरती को गर्म होने से रोक भी लें, तब भी आने वाले कई दशकों तक यह पिघलाव थमेगा नहीं।