नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। ईरान के चाबहार शहर में हुए आतंकी हमले का भारत ने कड़ी निंदा की है। यह शहर पाकिस्तान सीमा से महज 90 किलोमीटर दूर है और इस शहर के पास ही भारत की मदद से चाबहार पोर्ट और औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जा रहा है। हमले में स्थानीय आतंकी संगठनों का हाथ माना जा रहा है और यह भारत की तरफ से बनाये जा रहे पोर्ट से दूर है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे बेहद घृणास्पद हमला करार देते हुए कहा, ''भारत इस हमले में मारे गये लोगों के परिवारों और ईरान की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता है। हम घायलों के जल्द से जल्द स्वास्थ्य सुधार की कामना करते हैं। साथ ही जो लोग इस हमले में शामिल हैं उन्हें कानूनी सजा दिलाने की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।''

बताते चलें कि भारत पिछले चार वर्षों से चाबहार में एक पोर्ट बना रहा है जिसके संचालन की जिम्मेदारी हाल ही में भारतीय कंपनी को मिली है। यह पोर्ट पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है जिसका निर्माण चीन ने किया है। एक तरह से चाबहार को भारत का चीन को दिया गया जवाब के तौर पर देखा जाता है। भारत चाबहार से अफगानिस्तान तक सड़क बना रहा है और इस पर एक रेल मार्ग भी बनाने की योजना है। भारत के सड़क व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ महीने पहले संसद में बताया था कि चाबहार में भारतीय निवेश से एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी गठित किया जाएगा। इसमें भारतीय कंपनियां दो लाख करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकती है। यही वजह है कि भारत इस पोर्ट के आसपास होने वाली गतिविधियों को लेकर सतर्क रहता है।

भारत को पूर्व में इस बात की सूचना मिलती रही है कि चाबहार के आस-पास पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन सक्रिय है। इस बात पर ईरान और पाकिस्तान में कई बार झड़पें भी हो चुकी हैं। ईरान ने पाकिस्तान पर अपने अंदरुनी मामले में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया है। माना जाता है कि पाकिस्तान के सुन्नी आतंकी संगठन चाबहार में सक्रिय है। इन संगठनों पर ही भारत के पूर्व नौ सेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को अगवा कर पाकिस्तान को सौंपने का शक है। जाधव को चाबहार के पास ही अगवा किया गया था।

Posted By: Manish Negi