- 15 सौ परिवार दस भुजावाली देवी दुर्गा के विसर्जन के बाद चार भुजाधारिणी दुर्गा की करते है अराधना

-पिछले 500 साल से होती है पूजा

संवाद सूत्र, रायगंज : रायगंज के निवासियों के मंगल कामनाओं के लिए चतुर्भुजी देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना में भक्त डूब गए है। पौराणिक मान्यता और परम्परा के अनुसार इस दुर्गा की आराधना विजय दशमी के दिन तब प्रारंभ होती है, जब शारदीय दस भुजा वाली दुर्गा का विसर्जन हो रहा होता है। रायगंज प्रखंड के कमलाबाड़ी अंचल के खादिमपुर में इस अद्भुत तेजस्विता देवी दुर्गा पूजन का आयोजन किया जा रहा है।

इलाके के 15 सौ परिवार के लोग विगत 500 सौ वर्ष से इलाके के कल्याण और एक महत्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस देवी की पूजा करते आ रहे हैं, जिन्हें ये लोग बोलाई चंडी के नाम से पुकारते है। इस सन्दर्भ में पूजा कमिटि के अध्यक्ष फूल कान्त बर्मन ने बताया कि लगभग 500 सौ साल पहले इस गाँव और इसके आस-पास के इलाके में भयानक प्राकृतिक आपदा आया था जिसमें कई लोग मारे गए, कई घर उजड़ गए, फसलें बर्बाद हो गए. लोगों को जिंदगी से सस्ती मौत लगने लगी. ऐसी विकट बेला में इलाके वासियों ने मंगल कामनार्थ माँ भगवती के इस स्वरुप की आराधना करने लगे। कहा जाता है कि इसके तुरंत बाद से ही यहाँ खुशहाली छा गई। तभी से लोग विजय दशमी के दिन से एक सप्ताह भर दुर्गा पूजा के आयोजन में लीन रहते है। इसके बाद इस प्रतिमा को साल भर रखा जाता है और आगामी वर्ष विश्वकर्मा पूजा के दिन इसका विसर्जन किया जाता है। उल्लेखनीय है कि चार भुजा वाली इस दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष असुर व महिषासुर नहीं होते हैं। दुर्गा के बगल में सिर्फ लक्ष्मी, गणेश, कार्तिक, सरस्वती विद्यमान रहते हैं और शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा सिंह पर आरूढ़ है तथा उनका यह स्वरुप रौद्र नहीं बल्कि सौम्य है। यहाँ पूजा अर्चना के साथ साथ पाठा एवं परवा के वलिदान का भी प्रचलन है। यहाँ के लोग बाहर से चंदा नहीं वसूलते बल्कि सारे खर्च खुद वहन करते है। लेकिन प्रत्येक दिन आगंतुक सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद का प्रबंध जरूर करते है। यहाँ उत्तर दिनाजपुर जिला के अलावे दक्षिण दिनाजपुर एवं मालदा जिला के विभिन्न इलाके के लोग आते है और आपदाओं से राहत देने की मिन्नतें करते है। पूजा के साथ-साथ सास्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हर दिन किया जाता है।

कैप्शन : देवी दुर्गा की अराधना करती महिला

Posted By: Jagran

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