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कुड़मी समाज को ST दर्जे के विरोध में 2 नवंबर को पुरुलिया में महाजुटान, 20 आदिवासी संगठन होंगे शामिल

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:02 PM (IST)

पुरुलिया में 2 नवंबर को 'भारत जाकात माझी पारगाना महल' द्वारा कुड़मी समाज को ST दर्जे के विरोध में एक विशाल आदिवासी सम्मेलन आयोजित होगा।

भारत जाकात माझी पारगाना महल के वरिष्ठ पदाधिकारी रतनलाल हांसदा।

भारत जाकात माझी पारगाना महल के वरिष्ठ पदाधिकारी रतनलाल हांसदा।

HighLights

  1. 2 नवंबर को पुरुलिया में विशाल आदिवासी सम्मेलन।

  2. कुड़मी समाज को ST दर्जे का हो रहा विरोध।

  3. आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा, फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई की मांग।

जागरण संवाददाता, पुरुलिया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत मानबाजार थाना क्षेत्र के पाथरकाटा जोड़ा मैदान में आगामी 2 नवंबर को आदिवासियों का एक विशाल सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। 
 
'भारत जाकात माझी पारगाना महल' द्वारा आहूत इस जनसभा को लगभग 20 अन्य आदिवासी संगठनों का समर्थन प्राप्त हुआ है। आयोजकों का दावा है कि इस सभा में रिकॉर्ड संख्या में आदिवासी समाज के लोग एकत्र होंगे।
 

कुड़मी समाज को ST दर्जा देने की कोशिशों का विरोध 

दरअसल, यह जनसभा कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की मांगों के विरोध में बुलाई गई है। बीते 20 सितंबर को टामना थाना क्षेत्र के कड़ाडी मैदान में 'आदिवासी कुड़मी समाज' की जनसभा हुई थी। 
 
जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी शामिल हुए थे। उस दौरान कुड़मी समाज ने खुले तौर पर भाजपा को समर्थन देने की बात भी कही थी।
 
इस घटनाक्रम के बाद से ही गैर-आदिवासियों को ST सूची में शामिल करने की कोशिशों के खिलाफ विभिन्न आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति बनानी शुरू कर दी थी।
 

अधिकारों पर अतिक्रमण हुआ तो होगा देशव्यापी आंदोलन 

भारत जाकात माझी पारगाना महल के वरिष्ठ पदाधिकारी रतनलाल हांसदा ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी भी समाज या संप्रदाय के खिलाफ नहीं है। 
 
हालांकि, यदि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा गैर-आदिवासियों को आदिवासी का दर्जा देने का प्रयास किया गया, तो आदिवासी समाज देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। 2 नवंबर की यह जनसभा इसी आंदोलन का पहला चरण है।
 

प्रमुख मांगें और अन्य मुद्दे 

पश्चिम बंगाल आदिवासी कल्याण समिति (पुरुलिया जिला) के अध्यक्ष सतन कुमार सोरेन ने बताया कि इस जनसभा में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से:
 
  • आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • पृथक संताली शिक्षा बोर्ड (Separate Santali Education Board) का गठन करना।
  • फर्जी एसटी (ST) प्रमाण पत्र बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करना शामिल है।
 

कुड़मी समाज का पक्ष 

दूसरी ओर, 'आदिवासी कुड़मी समाज' के मुख्य सलाहकार (मूल मानता) अजीत प्रसाद महतो का कहना है कि भारतीय संविधान के तहत हर समुदाय को अपनी जातीय पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का संवैधानिक अधिकार है। कुड़मी समाज संविधान के दायरे में रहकर ही अपने आदिवासी दर्जे की मांग को लेकर आंदोलन चला रहा है।
 

चार राज्यों से जुटेंगे लोग 

आयोजक संगठनों का दावा है कि मानबाजार में होने वाली इस जनसभा में पश्चिम बंगाल के अलावा झारखंड, ओडिशा और बिहार से भी भारी संख्या में लोग हिस्सा लेने पुरुलिया पहुंचेंगे।