संवाद सूत्र, मेदिनीपुर : पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत मेदिनीपुर समेत जंगल महल के विभिन्न भागों में बासंती पूजा की तैयारियां सोमवार को जोरों पर रही। मूर्तिकार प्रतिमा तैयार करने में जुटे रहे। गुरुवार से विधिवत पूजा शुरू होगी। जंगल महल में बासंती पूजा का अपना महत्व है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बासंती पूजा ही असल में दुर्गा पूजा है। भगवान श्रीराम के लंका पर चढ़ाई करने से पहले मां दुर्गा की इसी रूप में पूजा की जाती थी। इसलिए इसका चलन आदिकाल से है। दुर्गा पूजा का चलन बढ़ने के बावजूद जंगल महल के लोग बासंती पूजा को नहीं भूले हैं। इस अवसर पर पूरी तरह से दुर्गा पूजा की तरह ही पूजा आदि की जाती है। चार दिनों की पूजा होती है। बसंत के महीने में होने की वजह से बड़ी संख्या में भक्तों का समावेश इस पूजा में होता है। लोगों में इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लेकर लगातार कई दिनों का मेला भी आयोजित होता है। प्रख्यात मूर्तिकार भास्कर पाल ने बताया कि उन्हें कई प्रतिमाओं के निर्माण के आर्डर मिले हैं। गुरुवार से पहले प्रतिमा आर्डर देने वालों को मिल जाएगी।

Posted By: Jagran