संवाद सूत्र, मेदिनीपुर : मकर संक्रांति के उल्लास के बीच ही पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत विभिन्न भागों में सोमवार की शाम से वनदेवी पूजा की धूम शुरू हुई। रेलनगरी खड़गपुर समेत विभिन्न भागों में यह पूजा पूरी श्रद्धा व भक्ति के साथ की गई। स्थानीय नगरपालिका वार्ड 29 के सोनामुखी, झोली में यह पूजा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने बताया कि यह पूजा नौ दिन को होती है। 14 जनवरी को लाहावारण देवी, 15 को शीतला व मंगलवार से सोनामुखी की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं जिला मुख्यालय मेदिनीपुर के विभिन्न भागों में भी बड़म पूजा धूमधाम से की गई। आयोजनों में प्रमुख हबीबपुर बड़मा पूजा कमेटी के सचिव रविन्द्र नाथ माझी ने बताया कि इस पूजा के पीछे जंगल महल की परिस्थितियां है। कभी यह इलाका घना जंगल हुआ करता था। इसके भीतर जाने पर जीव-जंतुओं के हमले का डर हमेशा बना रहता था। अक्सर लोग जंगलों में रास्ता भूल जाया करते थे। इस खतरे से बचने के लिए लोगों ने वन को देवी मानते हुए पूजा का सहारा लिया। इसके तहत जंगलों में खास शैली की प्रतिमा बना कर उसकी पूजा की जाती थी। समय के साथ जंगल कटते गए और घनी आबादी बसती गई, लेकिन वे प्रतिमाएं आज भी हैं और परंपरा का निर्वाह करना लोग आज भी नहीं भूले। नई पीढ़ी भी इसे आत्मसात कर चुकी है।

Posted By: Jagran

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