-प्रशासन ने खुली हल्दी लेने के खिलाफ विधि-निषेद्य किया जारी

-हल्दी में आटा या पीसा हुआ चावल मिलाने से स्वास्थ्य पर हो सकता है घातक प्रभाव

-रसायनिक रंग से पेट संबंधी रोग होने की संभावना : डॉ. अमल कृष्ण मंडल

संवाद सूत्र, मालदा : चांचल महकमा के हरिशचंद्रपुर में मिलावटी हल्दी का कारोबार जोर-शोर से चल रहा है। इससे लोगों को पेट की बीमारी से संबंधित विभिन्न तरह की समस्या हो रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने हरिशचंद्रपुर के एक नंबर ब्लॉक प्रशासन से इसकी शिकायत की। स्थानीय निवासियों ने बताया कि हरिशचंद्रपुर थाना के इस्लामपुर, तिलडांगी, रामपुर आदि इलाके में हल्दी के साथ धान का भूसा, चावला, आटा सहित विभिन्न तरह का रासायनिक रंग मिलाया जाता है। इसे खुले बाजार में हल्दी के नाम पर बेचा जाता है। इसकी पहचान करना मुश्किल है। पैकेट के हल्दी की तुलना में इसका मूल्य कम होता है, इसलिए लोग खुले बाजार से हल्दी खरीदते है। इसे लेकर बहुत से लोग अपने घर में हल्दी पीस कर खाते है। रामपुर इलाके के हल्दी मिल के मालिक अतीश साहा ने बताया कि पहले मेरे मिल में भी हल्दी के साथ मिश्रण किया जाता है। लेकिन अब हमलोग विशुद्ध हल्दी ही बेचते है। गौरतलब है कि इस इलाके के विभिन्न स्कूलों में मिड डे मील के लिए खुले बाजार से हल्दी लेकर भोजन पकाया जाता है।

इस संबंध में हरिशचंद्रपुर ग्रामीण अस्पताल के ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमल कृष्ण मंडल ने बताया कि हल्दी में यदि चावला का गुड़ा, आटा व रासायनिक रंग मिलाने से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। प्रशासन को इसपर निगरानी रखनी चाहिए। हरिशचंद्रपुर के एक नंबर ब्लॉक के बीडीओ अनिर्वाण बसु ने बताया कि हल्दी में मिलावट को लेकर एक शिकायत मिली है। हम पूरे मसले का देख रहे है। पुलिस की मदद लेकर कार्रवाई करेंगे।

कैप्शन : मिल में चोरी-छिपे हल्दी में आटा व अन्य सामग्री मिलाते मजदूर

Posted By: Jagran

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