राज्य ब्यूरो, कोलकाता : अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने और कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर कुर्मी समुदाय के लोगों द्वारा किये जा रहे आंदोलन के चलते बंगाल, झारखंड और ओडिशा के कई हिस्सों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन ट्रेन सेवाएं प्रभावित रही।

झारखंड व ओडिशा की सीमा से सटे बंगाल के जंगलमहल के कम से कम चार जिलों में प्रभाव रखने वाले कुर्मी समुदाय के हजारों सदस्यों ने बुधवार को भी पुरुलिया और पश्चिम मिदनापुर में पांच अलग-अलग संगठनों के एक संयुक्त मंच के तहत राज्य और केंद्र सरकारों के हस्तक्षेप की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों ने जंगल महल के जिलों में कई जगहों पर रेल पटरियों को जाम कर दिया।

आंदोलन के कारण दक्षिण पूर्व रेलवे को 55 ट्रेनों को रद करना पड़ा, 40 ट्रेनों का मार्ग बदल दिया गया और कई ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया। बंगाल के अलावा ओडिशा और झारखंड के कुर्मी समुदाय के लोग भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। इधर, इस आंदोलन पर कुर्मी संगठन के बंगाल समिति के अध्यक्ष राजेश महता ने कहा- हमें आजादी के तुरंत बाद एसटी के रूप में नामित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। हम मांग करते हैं कि हमारे समुदाय और भाषा को उनका हक दिया जाए।

इधर, एक आंकड़े के अनुसार, बंगाल में लगभग 50 लाख कुर्मी हैं और उनके वोट खासकर जंगलमहल के चार जिलों में कम से कम 35 विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यानी इन सीटों पर इस समुदाय के लोग जीत-हार तय करते हैं। कुर्मी समुदाय के सदस्यों ने दावा किया है कि उन्हें 1931 तक अनुसूचित जनजाति के रूप में पंजीकृत किया गया था लेकिन स्वतंत्रता के बाद अज्ञात कारणों से एसटी सूची से बाहर रखा गया था। उन्होंने कहा कि वे ओबीसी सूची में शामिल हैं, लेकिन एसटी समुदाय की सुविधाओं के पात्र हैं।

Edited By: Vijay Kumar