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बंगाल चुनाव: ममता सरकार ने 15 साल में क्या-क्या किया, कई उपलब्धियों के बाद भी आगे कितनी चुनौतियां?

Published: Sat, 04 Apr 2026 10:43 PM (IST)

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाल सरकार के 15 साल का कार्यकाल आगामी चुनावों में रिपोर्ट कार्ड के रूप ...और पढ़ें

ममता बनर्जी के 15 साल के काम (फोटो-पीटीआई)

ममता बनर्जी के 15 साल के काम (फोटो-पीटीआई)

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संक्षेप में पढ़ें

इंद्रजीत सिंह, कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में बंगाल में बीते 15 साल का दौर अब महज शासन का हिसाब-किताब नहीं, बल्कि जनता के सामने एक पूरा रिपोर्ट कार्ड बनकर खड़ा है।

तरक्की के दावों, सामाजिक योजनाओं की रौनक और बुनियादी ढांचे की तस्वीर के बीच यह सवाल भी उतनी ही शिद्दत से गूंज रहा है कि ये उपलब्धियां उसे फिर सत्ता का सिरमौर बनाएंगी या नहीं। फिलहाल उसके सामने कई चुनौतियों भी दिख रही हैं।

उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जहां एक तरफ इजाफा और पहल की दास्तां सुनाई देती है, वहीं बड़े निवेश की कमी, भर्ती प्रक्रियाओं पर उठते सवाल और स्वास्थ्य ढांचे पर बढ़ता दबाव ममता शासन के लिए इम्तिहान बनकर उभरे हैं।

ऐसे में बंगाल चुनाव के माहौल में यह 15 साल का सफर सिर्फ एक सियासी बहस नहीं, बल्कि जनता के फैसले की बुनियाद बनने जा रहा है। जहां हर दावा, हर वादा और हर हकीकत कसौटी पर है।

उद्योग में बड़े निवेश को आकर्षित करना, शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाना अभी भी प्राथमिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

एमएसएमई में विकास, पर बड़े निवेश में कमी

उद्योग की बात करें तो 15 वर्षों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) इकाइयों की संख्या 25 लाख से बढ़कर 88 लाख के पार पहुंच चुकी है। इसमें गैर पंजीकृत इकाइयां भी शामिल हैं। इस क्षेत्र ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसके बावजूद बड़े उद्योगों के निवेश के मामले में राज्य अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया है। वहीं 2011 में लगभग 4.70 लाख करोड़ रुपये का सकल राज्य घरेलू उत्पाद बढ़कर 2024-25 में करीब 18.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

शिक्षा क्षेत्र में पहुंच बढ़ी

शिक्षा क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का असर व्यापक स्तर पर देखा गया है। साक्षरता दर 2011 के 77 प्रतिशत से बढ़कर हाल के वर्षों में लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर पहले 10 प्रतिशत के आसपास थी, अब पांच प्रतिशत से नीचे आ गई है।

राज्य में विश्वविद्यालयों की संख्या 33 से बढ़कर 57 हो गई है। छात्राओं के लिए चलाई गई योजनाओं ने भी नामांकन बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार और योजनाओं के जरिए पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है। सरकारी अस्पतालों की संख्या 15 वर्षों में 1,270 से बढ़कर 1,500 से अधिक हो गई है, जबकि बेड क्षमता 71 हजार से बढ़कर 97 हजार के पार पहुंची है।

स्वास्थ्य साथी योजना के तहत 8.5 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इसके परिणामस्वरूप मातृ और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में भीड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

बुनियादी ढांचे का दायरा बढ़ा

पिछले 15 वर्षों (2010-2025) के दौरान बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 2011 में राज्य में सड़कों की कुल लंबाई लगभग तीन लाख किमी थी, जो वर्तमान (2024-25) तक बढ़कर लगभग 3.30 लाख किमी से अधिक होने का अनुमान है।

2025 तक बंगाल की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 11,000 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो वर्ष 2011 में लगभग 8,500 मेगावाट थी। पिछले 15 वर्षों में बुनियादी ढांचे पर खर्च 11 गुना तक बढ़ा है। लेकिन ग्रामीण बंगाल में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है।

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