महाघोटाला: पुरुषों को मिल रहा 'विधवा भत्ता' और लक्ष्मी भंडार, आमफन राहत में भी करोड़ों का गबन
पश्चिम बंगाल में सरकारी योजनाओं में बड़े घोटालों का खुलासा हुआ है, जिसमें 'लक्ष्मी भंडार', 'आमफन राहत' और 'विधवा भत्ता' जैसी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार सामने आया है।

(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता बदलने के बाद सरकारी योजनाओं में हुए चौंकाने वाले घोटालों की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर चल रही जांच में 'लक्ष्मी भंडार', 'आमफन राहत कोष', '100 दिन रोजगार योजना (मनरेगा)' और 'विधवा भत्ता' जैसी कल्याणकारी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार और जालसाजी का खुलासा हुआ है।
'लक्ष्मी भंडार' में 173 पुरुष उपभोक्ता
नदिया जिले के कृष्णनगर-दो ब्लाक में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महिलाओं के लिए चलाई जा रही 'लक्ष्मी भंडार' योजना का लाभ 173 पुरुष उठा रहे थे। विधानसभा चुनाव से महज दो महीने पहले, फरवरी से इन पुरुषों के खातों में अवैध रूप से पैसे भेजे जा रहे थे। इस जालसाजी के आरोप में बीडीओ कार्यालय के एक कर्मचारी भोला शील को कारण बताओ (शो-काज) नोटिस जारी किया गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य भर में करीब 30 लाख फर्जी लाभार्थियों ने इस योजना के तहत जनता के हजारों करोड़ रुपये लूटे हैं, जिसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया है।
आमफन राहत में 10 हजार फर्जी मछुआरे
भ्रष्टाचार का दूसरा बड़ा मामला दक्षिण 24 परगना के फलता में सामने आया है। साल 2020 में चक्रवात 'आमफन' का लैंडफाल सागर द्वीप में हुआ था, लेकिन मुआवजे की भारी-भरकम राशि 80 किलोमीटर दूर फलता में बांट दी गई।
कागजों पर 10,000 फर्जी मछुआरों की सूची बनाकर प्रत्येक के खाते में 20-20 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि स्थानीय वास्तविक पीड़ित आज भी दाने-दाने को मोहताज हैं।
इस घोटाले के पीछे अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगीर खान का नाम सामने आ रहा है, जो फिलहाल फरार है। इसके अलावा, डायमंड हार्बर के दियारक अंचल में तृणमूल के बंद कार्यालय का ताला तोड़ने पर भारी मात्रा में गरीबों के जाब कार्ड और राशन कार्ड बरामद हुए हैं। आरोप है कि नेताओं ने 100 दिन के काम का पैसा खुद हड़प लिया।
जीवित पुरुष डॉक्टर के खाते में आ रहा था 'विधवा भत्ता'
पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला ब्लाक में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार हो गई, जब एक पुरुष डाक्टर डा अमलेंदु विकास मंडल के खाते में महीनों से विधवा भत्ते की राशि जमा हो रही थी।
पुलिस ने आरोपी डाक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। डाक्टर ने खाते में पैसे आने की बात स्वीकार की है, लेकिन इसे प्रशासनिक लापरवाही या तकनीकी गड़बड़ी का नाम दिया जा रहा है। इन सभी मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि इन वित्तीय घोटालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
